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'महाप्रभु ने हर दुख से उबारा, मैं उनकी बेटी हूं', भगवान जगन्नाथ पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का भावुक लेख

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रथयात्रा के पावन अवसर पर 'इस विशाल पथ पर' शीर्षक से एक भावुक लेख साझा किया है। इसमें उन्होंने भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हुए बताया कि कैसे महाप्रभु ने उन्हें जीवन के हर संकट से बाहर निकाला।

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रथयात्रा पर राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश (फाइल फोटो)

Photo : PTI

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी गहरी आस्था और भक्ति को साझा करते हुए एक बेहद भावुक लेख लिखा है। 'इस विशाल पथ पर' शीर्षक वाले इस लेख को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किया। राष्ट्रपति ने विस्तार से बताया है कि कैसे उनके जीवन के सबसे कठिन दौर में और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने के सफर में भगवान जगन्नाथ ने कदम-कदम पर उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें सहारा दिया।

अपने लेख में राष्ट्रपति मुर्मू ने बचपन के दिनों को याद करते हुए लिखा कि वह शुरुआत से ही जगन्नाथ जी की अनन्य भक्त रही हैं। उन्होंने अपने जीवन के उतार-चढ़ाव का जिक्र करते हुए लिखा, "वे सर्वदा मेरे परम आराध्य हैं। मेरे जीवन के उत्थान और पतन के वे नियंता हैं। मेरे दुख-सुख के कर्ता-धर्ता हैं। जीवन में मैंने बहुत कष्ट भी सहे हैं, लेकिन उन सब दुखों से मुझे महाबाहु (भगवान जगन्नाथ) ने उबारा है, क्योंकि मैं उनकी बेटी जो हूं"

राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने पर मांगी थी शक्ति

द्रौपदी मुर्मू ने उस ऐतिहासिक पल को भी याद किया जब उन्हें देश के राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था। उन्होंने लिखा कि नाम सामने आते ही उन्होंने सबसे पहले महाप्रभु को याद किया और प्रार्थना की, "प्रभु, आप मुझे इतनी ऊंचाई पर ले जा रहे हैं, पग-पग पर मुझे सहारा देना और सदा मेरे पास रहना।"

उन्होंने बताया कि दिल्ली में रहने के कारण वह पुरी की रथयात्रा में शामिल नहीं हो सकी थीं, इसलिए उन्होंने सुबह-सुबह हौजखास के जगन्नाथ मंदिर जाकर दर्शन किए और पूरे आत्मविश्वास के साथ अपना नामांकन दाखिल किया। 25 जुलाई 2022 को संसद के केंद्रीय कक्ष में देश के 15वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेते समय भी वह मन ही मन भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना कर रही थीं।

पुरी पहुंचकर जब पावन धूल में लेट गईं राष्ट्रपति

राष्ट्रपति बनने के बाद जब वह 10 नवंबर 2022 को पुरी के विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर पहुंचीं, तो वह खुद को रोक नहीं पाईं। मुर्मू ने लिखा, "श्रीमंदिर के सिंहद्वार के पास पहुंचते ही मैं खुद को भूल चुकी थी। पावन-पथ की धूल में साष्टांग लेटकर मैंने महाप्रभु को प्रणाम किया।" उन्होंने कहा कि महाप्रभु केवल जगत के नाथ ही नहीं, बल्कि अनाथों के नाथ हैं, जो दुनिया का दुःख दूर करने के लिए सदा तत्पर रहते हैं। इस लेख के जरिए राष्ट्रपति ने देशवासियों को रथयात्रा की बधाई भी दी और देश की समृद्धि की कामना की।

monu jha
मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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