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मणिपुर में फिर भड़की हिंसा: इंफाल में तीन घरों को लगाई गई आग, पुलिस से छीने हथियार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 27, 2023, 07:34 PM IST

Manipur Violence News: इंफाल में तीन घरों में आग की घटना के तुरंत बाद, लोग इलाके में इकट्ठा हो गए और केंद्रीय बलों को तैनाती की मांग करने लगे, जिससे उपद्रवियों को रोका जा सके। इसके बाद अधिकारियों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के कुछ गोले दागे।

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इंफाल में तीन घरों में आगजनी

Manipur Violence News: हिंसाग्रस्त मणिपुर से एक बार फिर तनाव बढ़ाने वाली खबरें सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजधानी इंफाल के न्यू लाम्बुलेन इलाके में रविवार दोपहर अज्ञात लोगों ने तीन खाली पड़े घरों में आग लगा दी। अधिकारियों ने बताया, सूचना के बाद मौके पर दमकलकर्मियों को भेजा गया और उन्होंने आग पर काबू पा लिया।

मणिपुर से यह खबर ऐसे समय पर सामने आई है, जब राज्य में शांति बहाली का काम तेजी से किया जा रहा है और कई इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। पुलिस ने बताया, आग की घटना के तुरंत बाद, लोग इलाके में इकट्ठा हो गए और केंद्रीय बलों को तैनाती की मांग करने लगे, जिससे उपद्रवियों को रोका जा सके। इसके बाद अधिकारियों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के कुछ गोले दागे।

सुरक्षाकर्मियों से छीने गए हथियार

मणिपुर के एक अन्य घटनाक्रम में सुरक्षाकर्मियों से हथियार छीनने का मामल सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, यह घटना रविवार देर रात करीब दो बजे हुई, जब पूर्व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशक के राजो के आवास की सुरक्षा कर रहे सुरक्षाकर्मियों से तीन हथियार छीन लिये गए। पुलिस ने बताया, यह घटना इंफाल पश्चिम जिले के इंफाल पुलिस स्टेशन के अंतर्गत सगोलबंद बिजॉय गोविंदा में हुई। छीने गए हथियारों में दो एके सीरीज राइफलें और एक कार्बाइन शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया, दोनों घटनाओं की जांच जारी है और पुलिस ने हथियार बरामद करने और इसमें शामिल लोगों को पकड़ने के लिए कई अभियान शुरू किए हैं।

3 मई को पहली बार भड़की थी हिंसा

बता दें, मणिपुर में पहली बार बीते 3 मई को हिंसा भड़की थी। यहां मैतेई और कुकी समुदाय के बीच तनाव जारी है। इस हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हैं। राज्य में सैकड़ों घरों को भी आग के हवाले कर दिया गया और यहां महिलाओं और युवतियों के साथ शर्मनाक घटनाएं सामने आई हैं। बता दें, मणिपुर में कुकी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला हुआ है और मैतेई समुदाय इस दर्जे की मांग कर रहा है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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