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मणिपुर सुलग रहा है... BJP विधायक को करंट, स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी को जिंदा जलाया और महिलाओं को नोंचती भीड़

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 25, 2023, 08:41 AM IST

Manipur Violence: सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के विधायक वुंगजागिन वाल्टे पर भी जानलेवा हमले की खबर है। भीड़ ने न सिर्फ उन्हें पीटा बल्कि करंट के झटके भी दिए गए। अब वह अपनी बोलने की क्षमता और खाद्दाश्त खो चुके हैं। वहीं, एक 80 साल की महिला को जिंदा जला दिया गया।

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मणिपुर में हिंसा

Manipur Violence: मणिपुर का तिनका-तिनका सुलग रहा है। हजारों घर जल चुके हैं, सैंकड़ों हत्याएं हुई हैं और न जानें कितनी लड़कियों के शरीर को भीड़ ने नोंच खाया है। बीते दिनों जब मणिपुर से दो महिलाओं को नग्न घुमाने का वीडियो सामने आया है, तो पूरे देश को अंदाजा लग गया कि यहां के हालात उस भयावह दौर में जा चुके हैं, जहां से वापस आना काफी मुश्किल है।

अब एक और बड़ी घटना सामने आई है। दरअसल, यहां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के विधायक वुंगजागिन वाल्टे पर भी जानलेवा हमले की खबर है। भीड़ ने न सिर्फ उन्हें पीटा बल्कि करंट के झटके भी दिए गए। हालत यह है कि भाजपा विधायक फिलहाल बेड रेस्ट पर हैं और सदमे से उबर नहीं पाए हैं।

भाजपा विधायक ने खोई याददाश्त

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मणिपुर के भाजपा विधायक वाल्टे जोसेफ ने बताया कि उनके पिता पर मैतेई समुदाय के उग्रवादियों ने हमला किया। उनके सिर पर कई वार किए गए, जिससे गहरे जख्म हो गए। यहां तक कि उनको कई बार करंट भी लगाया गया, जिससे अब वह अपनी बोलने की क्षमता और खाद्दाश्त खो चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें ठीक होने में वक्त लगेगा। वहीं भाजपा विधायक पत्नी माइनु वाल्टे कहती हैं कि सुरक्षा कारणों ने उनके परिवार ने इंफाल वापस नहीं लौटने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, मैतेई समुदाय ने हमें अलग-थलग कर दिया है। जब सत्तारूढ़ पार्टी के नेता के साथ ऐसा हो रहा है, तो अंदाजा लगाइए आम आदमी का क्या हाल होगा।

स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी को जिंदा जलाया

मणिपुर में भाजपा विधायक के साथ इस तरह की बर्बरता की यह कहानी अकेली नहीं है। ऐसी कई घटनाएं मणिपुर की जनता की चीत्कार में दबी पड़ी हैं। जानकारी के मुताबिक, यहां के उग्रवादियों ने स्वतंत्रता सेनानी की 80 वर्षीय पत्नी को भी जिंदा जला दिया। यह घटना इंफाल से 80 किलोमीटर दूरी पर हुई। भीड़ ने महिला समेत उसके पूरे घर को आग के हवाले कर दिया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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