Airbag Defect Case: करीब एक दशक पुराने सड़क हादसे से जुड़े एयरबैग डिफेक्ट मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए जगुआर इंडिया (jaguar land rover) को राहत दी है। आयोग ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस टेक्निकल सबूत नहीं है जिससे मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित हो सके।
इस मामले में करंजावाला एंड कंपनी की टीम ने जगुआर की ओर से पैरवी की। टीम में एडवोकेट सीमा सुंद, रितु राज श्रीवास्तव, स्नेहिल श्रीवास्तव, राहुल शर्मा और ईशान के झा शामिल रहे।
2013 के सड़क हादसे से शुरू हुआ विवाद
मामला 11 दिसंबर 2013 का है, जब हरविंदर सिंह भुल्लर एक रेंज रोवर ऑटोबायोग्राफी कार चला रहे थे। ऑर्डर के मुताबिक, कार करीब 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी, तभी अचानक एक नीलगाय सड़क पर आ गई और वाहन उससे टकरा गया। इस टक्कर में कार को भारी नुकसान हुआ और चालक को चोट भी आई।
एयरबैग न खुलने पर उठा सवाल
याचिकाकर्ता का मुख्य आरोप था कि ड्राइवर साइड एयरबैग नहीं खुला, जबकि पैसेंजर साइड एयरबैग खुल गया, जबकि सीट खाली थी। इसे गंभीर मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट बताया गया और कहा गया कि इससे जान को खतरा हो सकता था।
खरीद, वारंटी और बाद की घटनाएं
जानकारी के मुताबिक यह गाड़ी 2010 में खरीदी गई थी और उस पर 3 साल की वारंटी थी, जो मार्च 2013 तक लागू थी। हादसे के बाद वाहन का इंश्योरेंस के तहत रिपेयर कराया गया। बाद में शिकायतकर्ता ने इस वाहन को अपने नाम ट्रांसफर कर लिया और कंपनी को कई शिकायतें भेजीं।
कंपनी ने जांच का दिया भरोसा
रिकॉर्ड के मुताबिक कंपनी की तरफ से जवाब दिया गया कि मामले की जांच की जाएगी। क्रैश मॉड्यूल का एनालिसिस कराया जाएगा। सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के हिसाब से एयरबैग सिस्टम की जांच होगी।कंपनी ने यह भी कहा कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है।
5 करोड़ रुपये तक के मुआवजे की मांग
शिकायतकर्ता ने आयोग के सामने कई मांगें रखीं थी।वाहन बदलने की मांग, लंबी वारंटी देने की मांग और 5 करोड़ रुपये तक का मुआवजा जैसी मांगें थी। यह दावा मानसिक आघात और सुरक्षा जोखिम के आधार पर किया गया।
टेक्निकल रिपोर्ट बना फैसला का आधार
सुनवाई के दौरान जगुआर लैंड रोवर इंडिया लिमिटेडने विस्तृत टेक्निकल रिपोर्ट पेश की। साथ ही रॉबर्ट बॉश (Robert Bosch GmbH) की रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर रखी गई, जो रेस्ट्रेंट कंट्रोल मॉड्यूल से जुड़ी थी। इन रिपोर्ट्स में यह बताया गया कि एयरबैग सिस्टम हर टक्कर में एक जैसा काम नहीं करता और यह इम्पैक्ट की प्रकृति पर निर्भर करता है।
काउंटर एक्सपर्ट रिपोर्ट नहीं दे सके शिकायतकर्ता
आयोग ने अपने आदेश में यह अहम टिप्पणी की, कंपनी ने अपना टेक्निकल बर्डन पूरा कर दिया।लेकिन शिकायतकर्ता कोई काउंटर एक्सपर्ट रिपोर्ट पेश नहीं कर सके। यानी कंपनी के दावों को चुनौती देने के लिए ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं दिए गए।
शिकायत को बताया मेंटेनएबल नहीं
आयोग ने कहा कि शिकायत मेंटेनएबल नहीं है। वारंटी और तथ्यों के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर पूरी शिकायत खारिज कर दी गई।
