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जिस टेक्सटाइल पार्क की अध्यक्ष हैं अजित पवार की पत्नी, उसके बाहर घंटों खड़ी रहीं शरद पवार की वाइफ, गार्ड ने नहीं खोला गेट

Maharashtra News: प्रतिभा पवार और सुप्रिया की बेटी रेवती सुले को कम से कम 30 मिनट तक परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई। टेक्सटाइल पार्क के मुख्य प्रबंधक अनिल वाघ ने संपर्क किए जाने पर बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि प्रतिभा पवार परिसर का दौरा करने वाली हैं।

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शरद पवार की पत्नी प्रतिभा पवार।

Photo : ANI

Maharashtra News: एनसीपी प्रमुख शरद पवार की पत्नी प्रतिभा पवार को पुणे जिले के बारामती हाई-टेक टेक्सटाइल्स पार्क के परिसर में प्रवेश करने से कथित तौर पर आधे घंटे तक रोका गया। मामला रविवार का है। बारामती से सांसद सुप्रिया सुले के कार्यालय ने यह जानकारी दी। सुप्रिया सुले के कार्यालय की ओर से साझा किए गए एक वीडियो में प्रतिभा पवार और सुप्रिया की बेटी रेवती सुले की महिला सहायक पार्क के एक सुरक्षा गार्ड से गेट खोलने के लिए कहते हुए दिखाई दे रही हैं।

खास बात यह है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सदस्य सुनेत्रा पवार बारामती हाई-टेक टेक्सटाइल्स पार्क की अध्यक्ष हैं। बताया जा रहा है कि प्रतिभा पवार और रेवती सुले पार्क में कुछ खरीदारी करने के लिए पहुंची थीं। गार्ड ने उन्हें बताया कि उसे अनिल वाघ नाम के व्यक्ति ने गेट न खोलने का निर्देश दिया है।

30 मिनट तक नहीं दी गई प्रवेश की अनुमति

प्रतिभा और रेवती के साथ मौजूद एक पुरुष सहायक ने घटना की पुष्टि की और बताया कि उन्हें कम से कम 30 मिनट तक परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई। टेक्सटाइल पार्क के मुख्य प्रबंधक अनिल वाघ ने संपर्क किए जाने पर बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि प्रतिभा पवार परिसर का दौरा करने वाली हैं। वाघ ने दावा किया, मुझे केवल इतना बताया गया था कि एक रैली होने वाली है। चूंकि, ऐसी किसी रैली के लिए अनुमति नहीं थी, इसलिए मैंने गेट पर सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि वे किसी को भी अंदर न आने दें। वाघ ने कहा कि जब मुझे सूचना दी गई कि प्रतिभा काकी आई हैं, तो मैंने तुरंत सुरक्षाकर्मियों से गेट खोलने और उन्हें अंदर जाने देने को कहा। वाघ के अनुसार, प्रतिभा पवार और रेवती सुले ने पार्क परिसर में स्थित कुछ कंपनियों का दौरा किया और महिला श्रमिकों से बातचीत की।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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