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महाराष्ट्र में फिर शुरू होगा मराठा आंदोलन, जरांगे ने दी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी

Maratha Reservation: मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने कहा, यदि मराठवाड़ा के मराठा बाहर आते हैं, तो मुंबई के निवासियों को शहर छोड़ना पड़ सकता है। अगर आरक्षण नहीं दिया गया और मराठा समुदाय के लोग मुंबई पहुंच गए, तो उन्हें समायोजित करने के लिए 300 किमी क्षेत्र की जरूरत होगी।

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मनोज जरांगे ने दी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी।

Maratha Reservation: मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने एक बार फिर भूख हड़ताल की चेतावनी दी है। शनिवार को उन्होंने घोषणा की कि अगर सरकार मराठों को आरक्षण देने में विफल रहती है तो वह 20 जुलाई से अनिश्चितकालीन उपवास शुरू कर देंगे। जरांगे ने आंदोलन के अगले चरण के लिए मराठों से मुंबई में एकत्र होने का आग्रह किया है, जिसका कार्यक्रम 20 जुलाई को घोषित किया जाएगा।

छत्रपति संभाजीनगर में एक रैली में उन्होंने कहा कि अगर आधी रात तक उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो मराठा आरक्षण के लिए प्रदर्शन 20 जुलाई को जालना जिले के अंतरवाली सरती गांव में फिर से शुरू होगा। उन्होंने कहा, सरकार के लिए मराठा आरक्षण लागू करने की एक महीने की समय सीमा आज समाप्त हो गई है। आज मैं सरकार से कहता हूं कि मराठा समुदाय की नौ मांगों को पूरा किया जाना चाहिए। यह सिर्फ पहले चरण का अंत है।

मुंबई में होगा विरोध प्रदर्शन

मनोज जरांगे ने इस बात पर जोर दिया कि अगर सरकार शनिवार रात तक आरक्षण देने में विफल रहती है, तो 20 जुलाई को आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा और वह मुंबई में विरोध प्रदर्शन में भी शामिल होंगे। जरांगे सभी कुनबियों (कृषकों) और उनके रक्त संबंधियों को मराठा के रूप में मान्यता देने के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाणपत्र जारी करने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। जरांगे ने कहा, हम मुंबई नहीं आना चाहते हैं और उनके 288 उम्मीदवारों को हराना भी नहीं चाहते हैं। यह सरकार के लिए आखिरी मौका है। मैं चाहता हूं कि राज्य की सत्ता गरीब मराठा समुदाय के हाथों में रहे।

लड़ सकते हैं चुनाव

जरांगे ने घोषणा की कि वह अगले शनिवार को आगे के कदम का खुलासा करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मराठवाड़ा के मराठा बाहर आते हैं, तो मुंबई के निवासियों को शहर छोड़ना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, अगर आरक्षण नहीं दिया गया और मराठा समुदाय के लोग मुंबई पहुंच गए, तो उन्हें समायोजित करने के लिए 300 किमी क्षेत्र की जरूरत होगी। जिस दिन मैं अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करूंगा, मैं घोषणा करूंगा कि चुनाव लड़ना है या 288 उम्मीदवारों को हराना है और मुंबई जाने की तारीख भी बताऊंगा।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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