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देवेंद्र फडणवीस की सुरक्षा अचानक बढ़ी, सुरक्षा एजेंसी का अलर्ट; हथियारों के साथ हुए तैनात और जवान

Devendra Fadnavis's security: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सुरक्षा में अचानक से इजाफा कर दिया गया है। फडणवीस की सुरक्षा के लिए नागपुर पुलिस के "फोर्स वन" टीम के जवानों को हथियारों के साथ तैनात किया गया है। सुरक्षा एजेंसी के अलर्ट के बाद डिप्टी सीएम की सिक्योरिटी बढ़ाई गई है।

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अचानक से बढ़ाई गई देवेंद्र फडणवीस की सिक्योरिटी।

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की सियासत किस ओर करवट लेने वाली है, इसका फैसला करने के लिए विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। 20 नवंबर को वोटिंग के बाद 23 नवंबर को चुनावी नतीजे सामने आ जाएंगे। चुनावी सरगर्मी को देखते हुए सियासी उठापटक का दौर जारी है। इसी कड़ी में सूबे के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सुरक्षा में अचानक से इजाफा कर दिया गया है।

अचानक से बढ़ा दी गई देवेंद्र फडणवीस की सुरक्षा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सुरक्षा अचानक से बढ़ा दी गई है। जब देवेंद्र फडणवीस नागपुर के एयरपोर्ट पहुंचे तो अलग से पुलिस के जवान तैनात हो गए। नागपुर पुलिस की "फोर्स वन" टीम के जवान हथियारों के साथ तैनात किये गए है। ये जवान हथियारों के साथ अलर्ट मोड़ में तैनात किये गए हैं।

देवेंद्र फडणवीस के घर पर भी बढ़ाई गई सिक्योरिटी

इतना ही नहीं देवेंद्र फडणवीस के घर में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है, उनके घर के मुख्य द्वार पर भी "फोर्स वन" टीम के जवानों को हथियारों के साथ तैनात किया गया है। आपको बता दें, मौजूदा समय पर देवेंद्र फडणवीस को Z प्लस सुरक्षा दी गई है, लेकिन इंटेलिजेंस ब्यूरो सहित अलग-अलग सुरक्षा एजेंसी से मिले इनपुट के बाद ये सुरक्षा बढ़ाई गयी है।

हालांकि माना ये जा रहा है कि जिस तरह से लगातार लॉरेंस बिश्नोई गैंग धमकी और अपना नाम बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र में लगातार गतिविधि कर रहा है। ऐसे में महाराष्ट्र के गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस को सुरक्षित रखने के लिए ये सुरक्षा बढ़ाई गई है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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