मानसून सत्र से पहले आज सुबह 11 बजे कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास (10 जनपथ) पर कांग्रेस संसदीय दल की बैठक हुई। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और शशि थरूर के अलावा, तारिक अनवर, गौरव गोसाई, के सुरेश, जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी सहित कई दिग्गज नेता पहुंचे। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए पार्टी सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, "हम इस मुद्दे (राम मंदिर के चंदे की कथित चोरी) को जरूर उठाएंगे। यह एक बड़ा मुद्दा है। यह लोगों के भरोसे और आस्था का धोखा है।"
खरगे ने क्या कहा?
वहीं, मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, 'चढ़ावा चोरी' यानी आस्था के साथ धोखा, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में गहराता भ्रष्टाचार, संस्थाओं पर कब्जा, राजनीतिक दलों को तोड़ने की राजनीति, कई घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोप, कमर तोड़ महंगाई, विदेश नीति की विफलताएं और रणनीतिक चूक, 3.5 करोड़ वाहन मालिकों पर इथेनॉल ब्लेंडिंग थोपना, बेलगाम वनों की कटाई तथा अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर लगातार हो रहे हमले जैसे अहम मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी आगामी मानसून सत्र के दौरान मोदी सरकार को जवाबदेह ठहराएगी।
उन्होंने कहा कि देश के लोगों के जीवन और उनकी आकांक्षाओं से जुड़े इन गंभीर मुद्दों पर कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की बैठक में विस्तार से चर्चा की गई और संसद में इन्हें मजबूती से उठाने की रणनीति बनाई गई।
क्या है विपक्ष का एजेंडा?
मानसून सत्र के लिए विपक्ष को एक बैनर तले लाकर कांग्रेस का मकसद संयुक्त विपक्ष के साथ सरकार को घेरना और सरकार की दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत हासिल करने की मंशा पर ब्रेक लगाना है। बैठक में शामिल होने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और शशि थरूर के अलावा, तारिक अनवर, गौरव गोसाई, के सुरेश, जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी सहित कई दिग्गज नेता पहुंच चुके हैं।
केंद्र सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक
बता दें कि केंद्र सरकार ने भी मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में सरकार अपना विधायी एजेंडा बताएगी। इस सर्वदलीय बैठक में सरकार अपने विधायी एजेंडे को विपक्षी दलों के सामने रखेगी, जबकि विपक्ष सत्र के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों की जानकारी देगा।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सर्वदलीय बैठक 19 जुलाई को सुबह 11 बजे शुरू होगी। सनद रहे कि संसदीय परंपरा के हिसाब से हर बार संसद सत्र की शुरुआत से पहले सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाती है ताकि सरकार और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर आपसी सहमति बन सके और बिना किसी व्यवधान के सदन की कार्यवाही सुचारू ढंग से चल सके।
