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क्या कहता है कुर्सी का इतिहास? जानें मध्य प्रदेश पर अब तक किस-किसने किया शासन

Madhya Pradesh Chief Ministers List: एमपी के 67 साल के सियासी इतिहास में अब तक 32 बार सरकार बदल चुकी है और तीन बार राष्ट्रपति शासन लागू हो चुका है। मध्य प्रदेश में बतौर मुख्यमंत्री सबसे लंबा समय बिताने वालों की लिस्ट में शिवराज सिंह चौहान का नाम पहले नंबर पर है। आपको कुर्सी के इतिहास से रूबरू करवाते हैं।

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मध्य प्रदेश के इतिहास में अब तक 32 बार सरकार बदल चुकी है।

MP Chunav News: मध्य प्रदेश की सियासत में उठापटक का दौर काफी पुराना है। वर्ष 1977 तक कांग्रेस ने यहां भी एकतरफा राज किया। एमपी मध्य में पहली बार 29 अप्रैल 1977 को राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। जो 25 जून से 1977 तक रहा। पहली बार कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। जनता पार्टी के कैलाश चंद्र जोशी 26 जून 1977 के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। एमपी में कुर्सी से जुड़ा एक और रोचक किस्सा है। कांग्रेस के अर्जुन सिंह ने जब सिर्फ एक दिन के लिए मुख्यमंत्री पद का शपथ लिया। अगले ही दिन उन्हें सीएम की कुर्सी से इस्तीफा देना पड़ा था। मध्य प्रदेश में कब-कब कौन-कौन मुख्यमंत्री रहा, नीचे लिस्ट देखिए..

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की लिस्ट

  • भाजपा के शिवराज सिंह चौहान 23 मार्च 2020 से अभी तक एमपी के मुख्यमंत्री हैं।
  • कांग्रेस के कमलनाथ 18 दिसंबर 2018 से 23 मार्च 2020 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • भाजपा के शिवराज सिंह चौहान 14 दिसंबर 2013 से 17 दिसंबर 2018 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • भाजपा के शिवराज सिंह चौहान 13 दिसंबर 2008 से 13 दिसंबर 2013 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • भाजपा के शिवराज सिंह चौहान 29 नवंबर 2005 से 12 दिसंबर 2008 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • भाजपा के बाबूलाल गौर 23 अगस्त 2004 से 29 नवंबर 2005 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • भाजपा की उमा भारती 8 दिसंबर 2003 से 23 अगस्त 2004 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहीं।
  • कांग्रेस के दिग्विजय सिंह 1 दिसंबर 1998 से 8 दिसंबर 2003 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के दिग्विजय सिंह 7 दिसंबर 1993 से 1 दिसंबर 1998 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • मध्य प्रदेश में 16 दिसंबर 1992 से 6 दिसंबर से 1993 तक राष्ट्रपति शासन रहा।
  • भाजपा के सुंदरलाल पटवा 5 मार्च 1990 से 15 दिसंबर 1992 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के श्यामा चरण शुक्ला 9 दिसंबर 1989 से 4 मार्च 1990 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के मोतीलाल वोरा 25 जनवरी 1989 से 8 दिसंबर 1989 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के अर्जुन सिंह 14 फरवरी 1988 से 24 जनवरी 1989 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के मोतीलाल वोरा 12 मार्च 1985 से 13 फरवरी 1988 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के अर्जुन सिंह 11 मार्च 1985 से 12 मार्च 1985 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के अर्जुन सिंह 8 जून 1980 से 10 मार्च 1985 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • मध्य प्रदेश में 18 फरवरी 1980 से 8 जून से 1980 तक राष्ट्रपति शासन रहा।
  • जनता पार्टी के सुंदरलाल पटवा 20 जनवरी 1980 से 17 फरवरी 1980 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • जनता पार्टी के वीरेन्द्र कुमार सक्लेचा 20 जनवरी 1978 से 19 जनवरी 1980 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • जनता पार्टी के कैलाश चंद्र जोशी 26 जून 1977 से 17 जनवरी 1978 तक एमपी के सीएम रहे।
  • मध्य प्रदेश में 29 अप्रैल 1977 से 25 जून से 1977 तक राष्ट्रपति शासन रहा।
  • कांग्रेस के श्यामा चरण शुक्ला 23 दिसंबर 1975 से 29 अप्रैल 1977 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के प्रकाश चंद्र सेठी 23 मार्च 1972 से 22 दिसंबर 1975 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के प्रकाश चंद्र सेठी 29 जनवरी 1972 से 22 मार्च 1972 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के श्यामा चरण शुक्ला 26 मार्च 1969 से 28 जनवरी 1972 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के राजा नरेशचंद्र सिंह 13 मार्च 1969 से 25 मार्च 1969 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के गोविंद नारायण सिंह 30 जुलाई 1967 से 12 मार्च 1969 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के द्वारका प्रसाद मिश्रा 9 मार्च 1967 से 29 जुलाई 1967 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के द्वारका प्रसाद मिश्रा 30 सितंबर 1963 से 8 मार्च 1967 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के भगवंतराव मंडलोई 12 मार्च 1962 से 29 सितंबर 1963 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के कैलाश नाथ काटजू 14 मार्च 1957 से 11 मार्च 1962 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के कैलाश नाथ काटजू 31 जनवरी 1957 से 14 मार्च 1957 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के भगवंतराव मंडलोई 1 जनवरी 1957 से 30 जनवरी 1957 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।
  • कांग्रेस के पं रविशंकर शुक्ल 1 नवंबर 1956 से 31 दिसंबर 1956 तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे।

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में सरगर्मी तेज हो चुकी है। भाजपा और कांग्रेस मध्य प्रदेश चुनाव में आमने सामने होगी। शिवराज सिंह चौहान जो लंबे समय तक सीएम रहने का रिकॉर्ड बना चुके हैं, वो अपनी कुर्सी बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। तो वहीं साल 2020 में हुए सियासी जंग में मिली हार का प्रतिशोध लेने के लिए कमलनाथ पूरी ताकत झोंक रहे हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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