Brahmos Missile : 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों एवं एयरबेस को तबाह एवं बर्बाद करने वाली भारत की ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया भर में चर्चा का विषय तो बनी ही हुई है। दुनिया के तमाम देशों का इस पर 'दिल' आ गया है। ब्रह्मोस की ताकत देखने के बाद ये देश भारत से इसे खरीदकर अपनी रक्षा क्षमताएं बढ़ाना चाहते हैं। इस मिसाइल को खरीदने की रेस शुरू हो गई है। भारत की यह सुपरसोनिक मिसाइल अपनी सटीकता एवं मारक क्षमता के लिए जानी जाती है। यह 'फायर एंड फॉरगेट' के सिद्धांत पर काम करती है।
रिपोर्टों के मुताबिक 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद जिन देशों ने ब्रह्मोस खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। वे देश हैं-थाईलैंड, सिंगापुर, ब्रुनेई, इजिप्ट, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान, ब्राजील, चिली, अर्जेंटीना और वेनेजुएला। भारत ने फिलिपिंस के साथ पहले ही 2022 में डील की थी और एक खेप ब्रह्मोस की डिलीवरी भी हो चुकी है। दूसरा खेप 2026 में डिलीवर किया जा सकता है।

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ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम से विकसित एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मोस्कवा नदी के नामों को जोड़कर रखा गया है। इसे ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित किया गया है, जो भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस के NPOM का संयुक्त उपक्रम है।

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ब्रह्मोस मिसाइल की गति लगभग 2.8 से 3 मैक (ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज) है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक बनाती है। यह मिसाइल जमीन, समुद्र, वायु और अब सबमरीन (पनडुब्बी) प्लेटफॉर्म से भी दागी जा सकती है, जिससे इसकी बहुउपयोगिता और मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।

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ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज प्रारंभ में 290 किलोमीटर थी, लेकिन भारत के मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR) में शामिल होने के बाद इसकी रेंज बढ़ाकर 450-800 किलोमीटर तक की जा चुकी है। यह मिसाइल अपने साथ भारी पेलोड (लगभग 200-300 किलोग्राम तक) ले जाने की क्षमता रखती है। इसे किसी भी मौसम में और किसी भी समय इस्तेमाल किया जा सकता है।

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भारत ने इसे नौसेना, वायुसेना और थलसेना के लिए तैनात किया है। भविष्य में ब्रह्मोस को हाइपरसोनिक वर्जन (ब्रह्मोस-II) के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसकी गति 5 मैक से अधिक होगी। ब्रह्मोस भारत की रणनीतिक शक्ति का प्रतीक है और देश की रक्षा प्रणाली को आधुनिकता व आत्मनिर्भरता की ओर ले जाता है।
