राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि एलजीबीटीक्यूआईए समुदाय (LGBTQIA Community) समाज का एक अहम हिस्सा है, लेकिन अभी शादी की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे 'अनचाहे दुष्प्रभाव' हो सकते हैं।हालांकि, उन्होंने कहा कि समलैंगिक जोड़ों के लिए एक अलग कानूनी ढांचा हो सकता है।
मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान समलैंगिक विवाह पर आरएसएस के विचारों के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए भागवत ने कहा, 'कानून समाज को तय नहीं करता, समाज कानूनों को तय करता है, और समाज को पहले बदलाव के लिए तैयार होना चाहिए।'
'हमारे समाज में उन्हें साथ लेकर चलने की परंपरा रही है'
भागवत 'इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशन्स' (IIMUN) के 15वें वर्षगांठ कार्यक्रम में 'जेन-जी' और 'जेन अल्फा' के लगभग 2,000 सदस्यों को संबोधित कर रहे थे।भागवत ने कहा कि संघ का हमेशा से यह मानना रहा है कि एलजीबीटीक्यूआईए लोग 'उस समाज का हिस्सा हैं जिससे हम जुड़े हैं, और हमारे समाज में उन्हें साथ लेकर चलने की परंपरा रही है।'
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भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा में, शादी परिवार बनाने के लिए बनाई गई एक संस्था है, जो समाज की बुनियादी इकाई के तौर पर काम करती है और आने वाली पीढ़ियों का पालन-पोषण करती है। उन्होंने कहा, 'हमारी पारंपरिक विवाह व्यवस्था सिर्फ दो लोगों के साथ रहने की सुविधा नहीं है। यह एक ऐसी संस्था है जिसके जरिये परिवार बनता है, और परिवार समाज की वह इकाई है, जहां अगली पीढ़ी को तैयार किया जाता है।'
'...तो इसके अनचाहे दुष्प्रभाव हो सकते हैं'
संघ प्रमुख ने कहा, 'हमें पहले समाज को तैयार करना होगा, क्योंकि कानून समाज को तय नहीं करता, समाज कानूनों को तय करता है। इस चरण में, अगर हम मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव करते हैं, तो इसके अनचाहे दुष्प्रभाव हो सकते हैं।' भागवत ने सुझाव दिया कि समलैंगिक जोड़ों के लिए एक अलग कानूनी ढांचे पर विचार किया जा सकता है। एलजीबीटीक्यूआईए, एक संक्षिप्त शब्द है, जो विभिन्न लैंगिक पहचान और यौन रुझानों वाले लोगों के समूह को दर्शाता है।
