कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम ढहने से 16 लोगों की मौत के मामले में जांच तेज हो गई है। इस बीच,कोलकाता के पूर्व महापौर फिरहाद हकीम के तत्कालीन विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) कालीचरण बंदोपाध्याय को गिरफ्तार किए जाने के बाद शुक्रवार को अदालत ने उन्हें चार जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। वहीं, इस हादसे को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति भी गरमा गई है और अब पूर्व महापौर फिरहाद हकीम की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
अलीपुर अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए कालीचरण बंदोपाध्याय को 4 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने उन्हें बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किया था। ये गिरफ्तारी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा विधानसभा में एक व्यक्ति की भूमिका पर सवाल उठाने के कुछ घंटों बाद हुई। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री का इशारा बंदोपाध्याय की ओर था।
विशेष लोक अभियोजक सौरिन घोषाल ने अदालत को बताया कि बंदोपाध्याय गोदाम निर्माण के लिए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल थे। उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत इसलिए जरूरी है ताकि उस कथित रैकेट का खुलासा किया जा सके, जो कोलकाता नगर निगम (केएमसी) से भवन निर्माण लाइसेंस दिलाने का काम करता था और जिसमें आरोपी की भूमिका होने का संदेह है।
16 मौतों के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
बुधवार को हुए इस हादसे में शुक्रवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। मलबे से दो और शव निकाले गए, जबकि दो घायलों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस मामले ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। बीते दिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में कहा था कि गोदाम निर्माण की अंतिम मंजूरी उस समय दी गई थी,जब फिरहाद हकीम कोलकाता के महापौर और नगर भवन विभाग के प्रमुख थे।सरकारी अभिलेखों के अनुसार, निर्माणाधीन गोदाम के प्रस्ताव को पिछले वर्ष 20 नवंबर को नगर भवन समिति की बैठक में मंजूरी मिली थी। अंतिम स्वीकृति के लिए महापौर अथवा भवन विभाग के प्रभारी महापौर-परिषद सदस्य की मंजूरी आवश्यक थी। उस समय दोनों जिम्मेदारियां फिरहाद हकीम के पास थीं और उन्होंने संबंधित फाइल पर हस्ताक्षर किए थे।
हकीम ने आरोपों से किया इनकार
वहीं, फिरहाद हकीम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी जानकारी में गोदाम अवैध नहीं था। उन्होंने कहा कि किसी भी महापौर या आयुक्त के लिए हर निर्माण स्थल की व्यक्तिगत निगरानी करना संभव नहीं है और फाइल पर उनके हस्ताक्षर केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा थे। उन्होंने यह भी कहा कि वह तकनीकी विशेषज्ञ नहीं हैं। हालांकि,उनके इस स्पष्टीकरण के बाद भी विवाद थमता नहीं दिख रहा है।
कार्रवाई की मांग हुई तेज
तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी हकीम को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विधायक कुणाल घोष ने हकीम से हिरासत में पूछताछ की मांग की है। वहीं सांसद महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि यदि अन्य मामलों में आरोपी लंबे समय तक जेल में रहे हैं तो हकीम अब तक जांच से बाहर क्यों हैं।
