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Rameshwaram Cafe Owners: बेंगलुरू के जिस कैफे में हुआ ब्लास्ट, उसका मालिक कौन?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 2, 2024, 03:00 PM IST

Rameshwaram Cafe Owners Reaction After Blast: रामेश्वरम फैके में हुए ब्लास्ट के बाद कैफे मालिकों की तरफ से प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि हम अपनी ब्रुकफील्ड शाखा में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना से बेहद दुखी हैं। हम अधिकारियों और अधिकारियों के साथ उनकी जांच में सहयोग कर रहे हैं। आइए जानते हैं रामेश्वरम कैफे के मालिकों के बारे में...

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रामेश्वरम कैफे के मालिक दिव्या राघवेंद्र राव व राघवेंद्र राव (Instagram)

Rameshwaram Cafe Owners on Blast : बेंगलुरू के ब्रुकफील्ड स्थित रामेश्वरम कैफे में शुक्रवार को हुए ब्लास्ट में 10 लोग घायल हो गए थे। घटना के बाद कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि रामेश्वरम कैफे में हुए ब्लास्ट में सीसीटीवी के माध्यम से संदिग्ध आरोपी की पहचान कर ली गई है। उसकी उम्र 28 से 30 साल के करीब है और आरोपी को पकड़ने के लिए सात से आठ टीमें बनाई गई हैं। बेंगलुरु पुलिस ने कैफे में विस्फोट के संबंध में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

उधर, घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सरकार पर कई सवाल खड़े किए हैं। बीजेपी ने घटना की NIA जांच की मांग की है। बीती रात कर्नाटक के राज्यपाल व अन्य भाजपा नेता घायलों का हाल-चाल लेने अस्पताल भी गए। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस कैफे को कौन चलाता था? इसका मालिक कौन है? घटना के बाद कैफे ऑनर ने क्या कहा? आइए जानते हैं...

रामेश्वरम कैफे मालिकों की ओर से क्या कहा गया?

रामेश्वरम फैके में हुए ब्लास्ट के बाद कैफे मालिकों की तरफ से प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि हम अपनी ब्रुकफील्ड शाखा में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना से बेहद दुखी हैं। हम अधिकारियों और अधिकारियों के साथ उनकी जांच में सहयोग कर रहे हैं और घायलों को सहायता प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हमारी संवेदनाएं घायलों और उनके परिवारों के साथ हैं और हम उन्हें हरसंभव सहायता, सहायता और देखभाल की पेशकश कर रहे हैं और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।

कौन हैं रामेश्वरम कैफे के मालिक?

रामेश्वरम कैफे के मालिक राघवेंद्र राव और दिव्या राघवेंद्र राव हैं। राघवेंद्र राव एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं और उनके पास खाद्य उद्योग में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह आईडीसी किचन के संस्थापक और प्रमोटर भी हैं और वह रामेश्वरम कैफे चेन चलाते हैं। वहीं, दिव्या राघवेंद्र राव एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद से फाइनेंस और मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। वह रामेश्वरम कैफे के प्रबंधन और वित्त विभाग की प्रमुख हैं। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, दिव्या राघवेंद्र राव के पास 12 साल से अधिक का कार्य अनुभव है। वह आईसीएआई की दक्षिण भारतीय क्षेत्रीय परिषद की बेंगलुरु शाखा की प्रबंध समिति की सदस्य भी हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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