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86 साल पुराना इंतजार खत्म! किशाऊ परियोजना को लेकर छह राज्यों ने MoA पर किए हस्ताक्षर, यमुना को मिलेगा नया जीवन

बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और छह राज्यों के मुख्य सचिव भी मौजूद रहे। करीब एक घंटे चली बैठक में राज्यों और केंद्र के बीच करीब 28 MoA पर हस्ताक्षर किए गए।

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किशाऊ परियोजना पर एक साथ आए छह राज्य।

यमुना बेसिन में जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और लंबे समय से अटकी किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में मंगलवार को बड़ा कदम उठाया गया। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में किशाऊ परियोजना के निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए।

बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और छह राज्यों के मुख्य सचिव भी मौजूद रहे। करीब एक घंटे चली बैठक में राज्यों और केंद्र के बीच करीब 28 MoA पर हस्ताक्षर किए गए।

तीन बड़ी परियोजनाओं पर बनी सहमति

ऊपरी यमुना बेसिन में जल भंडारण बढ़ाने के लिए पहले ही रेणुकाजी और लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजनाओं को लेकर समझौते हो चुके हैं और दोनों परियोजनाओं पर काम चल रहा है। किशाऊ परियोजना तीसरी बड़ी परियोजना है, जिस पर छह राज्यों के बीच निर्माण को लेकर समझौता हुआ है।

यह परियोजना लंबे समय से लंबित थी। 16 जून को अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्यों के बीच किशाऊ परियोजना को लेकर सहमति बनी थी। अब MoA पर हस्ताक्षर होने के बाद परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

232.6 मीटर ऊंचा बनेगा बांध

किशाऊ परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस यमुना की प्रमुख सहायक नदी है और परियोजना का क्षेत्र उत्तराखंड के देहरादून तथा हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से जुड़ा है। परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनाया जाना है। इसमें करीब 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी के भंडारण की क्षमता होगी। इससे करीब 0.97 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही परियोजना से सालाना करीब 1,476 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होने का अनुमान है।

दिल्ली और राजस्थान को भी मिलेगा फायदा

अमित शाह के मुताबिक किशाऊ परियोजना से दिल्ली को सबसे बड़ा लाभ मिलेगा। परियोजना के जरिए यमुना में करीब 25 फीसदी अतिरिक्त पानी उपलब्ध होगा। इससे दिल्ली में पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह को भी बेहतर करने में मदद मिलेगी।किशाऊ जलाशय में जमा पानी का इस्तेमाल सिंचाई और बिजली उत्पादन के साथ-साथ पेयजल और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। खासतौर पर दिल्ली और राजस्थान के लिए यह परियोजना जल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परियोजना से यमुना में पानी का प्रवाह बढ़ाने और नदी के पुनर्जीवन में भी मदद मिलने की उम्मीद है। राज्यों के बीच हुए समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर भी सहमति बनी है। इसके बदले हिमाचल प्रदेश के पावर कंपोनेंट की लागत में हिस्सेदारी की व्यवस्था की जाएगी।

90 फीसदी खर्च केंद्र उठाएगा

बैठक में तय किया गया है कि किशाऊ बांध परियोजना के वॉटर कंपोनेंट की 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी। बाकी 10 फीसदी वित्तीय भार छह भागीदार राज्यों के बीच साझा किया जाएगा। परियोजना का क्रियान्वयन किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड करेगा। यह हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों का संयुक्त उपक्रम है। अमित शाह ने कहा कि सभी राज्यों की सहमति के बाद अब सरकार का लक्ष्य परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यमुना को साफ करने का लक्ष्य 2029 तक हासिल किया जा सकेगा।

1994 के समझौते से जुड़ी है परियोजना

किशाऊ परियोजना की पृष्ठभूमि करीब तीन दशक पुरानी है। 12 मई 1994 को ऊपरी यमुना बेसिन के राज्यों ने यमुना के उपयोग योग्य सतही जल के बंटवारे को लेकर MoU किया था। इसमें ओखला बैराज तक यमुना के पानी के इस्तेमाल की व्यवस्था तय की गई थी। इस समझौते में ऊपरी यमुना बेसिन में जल भंडारण परियोजनाएं विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया था। किशाऊ परियोजना उसी व्यापक योजना का हिस्सा है।
Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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