यमुना बेसिन में जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और लंबे समय से अटकी किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में मंगलवार को बड़ा कदम उठाया गया। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में किशाऊ परियोजना के निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए।
बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और छह राज्यों के मुख्य सचिव भी मौजूद रहे। करीब एक घंटे चली बैठक में राज्यों और केंद्र के बीच करीब 28 MoA पर हस्ताक्षर किए गए।
तीन बड़ी परियोजनाओं पर बनी सहमति
ऊपरी यमुना बेसिन में जल भंडारण बढ़ाने के लिए पहले ही रेणुकाजी और लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजनाओं को लेकर समझौते हो चुके हैं और दोनों परियोजनाओं पर काम चल रहा है। किशाऊ परियोजना तीसरी बड़ी परियोजना है, जिस पर छह राज्यों के बीच निर्माण को लेकर समझौता हुआ है।यह परियोजना लंबे समय से लंबित थी। 16 जून को अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्यों के बीच किशाऊ परियोजना को लेकर सहमति बनी थी। अब MoA पर हस्ताक्षर होने के बाद परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
232.6 मीटर ऊंचा बनेगा बांध
किशाऊ परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस यमुना की प्रमुख सहायक नदी है और परियोजना का क्षेत्र उत्तराखंड के देहरादून तथा हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से जुड़ा है। परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनाया जाना है। इसमें करीब 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी के भंडारण की क्षमता होगी। इससे करीब 0.97 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही परियोजना से सालाना करीब 1,476 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होने का अनुमान है।
दिल्ली और राजस्थान को भी मिलेगा फायदा
अमित शाह के मुताबिक किशाऊ परियोजना से दिल्ली को सबसे बड़ा लाभ मिलेगा। परियोजना के जरिए यमुना में करीब 25 फीसदी अतिरिक्त पानी उपलब्ध होगा। इससे दिल्ली में पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह को भी बेहतर करने में मदद मिलेगी।किशाऊ जलाशय में जमा पानी का इस्तेमाल सिंचाई और बिजली उत्पादन के साथ-साथ पेयजल और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। खासतौर पर दिल्ली और राजस्थान के लिए यह परियोजना जल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परियोजना से यमुना में पानी का प्रवाह बढ़ाने और नदी के पुनर्जीवन में भी मदद मिलने की उम्मीद है। राज्यों के बीच हुए समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर भी सहमति बनी है। इसके बदले हिमाचल प्रदेश के पावर कंपोनेंट की लागत में हिस्सेदारी की व्यवस्था की जाएगी।
