Karnataka Portfolio Crisis: कर्नाटक की सत्ता संभालते ही शिवकुमार के सामने एक संकट खड़ा हो गया। इस संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने मिलकर समाधान निकाला। दरअसल, शिवकुमार के वरिष्ठ कैबिनेट सहयोगी रामलिंगा रेड्डी ने अचानक इस्तीफा दे दिया। इस खबर से कांग्रेस के भीतर छिपा असंतोष निकलकर सामने आया और पार्टी में मान-मनोव्वल का दौर शुरू हुआ।
रामलिंगा रेड्डी के मुताबिक, शिवकुमार और सुरजेवाला इस मुद्दे को सुलझाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। साथ ही सुरजेवाला ने रेड्डी से इस्तीफा वापस लेने की अपील भी की थी।
शिवकुमार के 'संकटमोचक' बने सुरजेवाला
कांग्रेस आलाकमान के भरोसेमंद सुरजेवाला ने कर्नाटक में सत्ता संभालने की महज 3 दिन बाद उत्पन्न हुए संकट को समाप्त कर दिया। हिंदी समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सुरजेवाला ने बताया कि रामलिंगा रेड्डी का अनुभव कांग्रेस के लिए बेहद कीमती है। उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है।
सुरजेवाला ने कहा, "रामलिंगा रेड्डी कांग्रेस पार्टी के लिए बहुत जरूरी हैं। उनका अनुभव पार्टी के लिए बेहद कीमती है। हमने उनसे बात की; कुछ गलतफहमी हुई थी। उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। वह पार्टी के एक वफादार सिपाही और मंत्री के तौर पर काम करते रहेंगे। असल में, भाजपा सदमे में है, क्योंकि उन्हें लगा कि वे सत्ता के आसान ट्रांसफर में रुकावट डाल सकते हैं...।"
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'नहीं स्वीकार होगा इस्तीफा'
इससे पहले, शिवकुमार ने एक बात स्पष्ट कर दी थी कि रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे को आंतरिक रूप से बातचीत के माध्यम से हल किया जाएगा। उन्होंने कहा, ''रामलिंगा रेड्डी ने शायद मुझे वॉट्सएप पर अपना इस्तीफा भेजा होगा। मैं पूरी रात व्यस्त था। किसी भी हालत में हम उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं करेंगे। मैं उनसे बात करूंगा। मैं सबसे बात करूंगा।''
शिवकुमार ने इस बात पर जोर दिया था कि इस मामले को और बढ़ने देने के बजाय पार्टी और सरकार के भीतर ही सुलझा लिया जाएगा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता रेड्डी ने शुक्रवार को इस्तीफे की घोषणा की थी, क्योंकि उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग के बजाय वृहद और मध्यम सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी।
