कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन और संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर चल रही अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दिल्ली पहुंच गए हैं। दोनों नेता 26 मई को कांग्रेस आलाकमान के साथ अहम बैठक करेंगे, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
दिल्ली रवाना होने से पहले सिद्धरमैया ने कहा कि उन्हें कांग्रेस नेतृत्व की ओर से बैठक के लिए बुलाया गया है, लेकिन एजेंडा क्या है इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने फोन कर बैठक की सूचना दी थी। इस दौरान जब नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं को लेकर उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी अटकलें हमेशा चलती रहती हैं। मुख्यमंत्री के साथ उनके करीबी माने जाने वाले मंत्री, जिनमें सतीश जारकीहोली, जी परमेश्वर और एचसी महादेवप्पा भी दिल्ली आए हैं।
शिवकुमार भी दिल्ली पहुंचे
वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार ने भी कर्नाटक में दिल्ली दौरे की पुष्टि करते हुए कहा कि “कुछ खास परिस्थितियों में मुझे जाना पड़ रहा है।” उन्होंने संकेत दिया कि वे केंद्रीय नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। हालांकि, मुख्यमंत्री बदलने के सवाल पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि यह फैसला पार्टी नेतृत्व का है।
नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा फिर तेज
कर्नाटक में 20 मई को कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद से नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा लगातार तेज हुई है। दरअसल, 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद से ही यह दावा किया जाता रहा है कि सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद साझा करने को लेकर कोई फार्मूला बना था। शिवकुमार समर्थक अब उसी कथित समझौते को लागू करने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, सिद्धरमैया लगातार यह कहते रहे हैं कि वह पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान का होगा। दूसरी ओर, शिवकुमार भी सार्वजनिक तौर पर यही कहते रहे हैं कि वे पार्टी नेतृत्व के फैसले का पालन करेंगे।
कांग्रेस आलाकमान की बैठक में इन मु्द्दों पर हो सकती है चर्चा
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान की बैठक में सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन ही नहीं बल्कि राज्यसभा चुनाव, विधान परिषद चुनाव और राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। कर्नाटक कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि फिलहाल पार्टी चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक परामर्श में व्यस्त है।
मंत्रिमंडल फेरबदल की मांग भी जोर पकड़ रही
इस बीच, पार्टी के भीतर मंत्रिमंडल फेरबदल की मांग भी जोर पकड़ रही है। कई विधायक मंत्री बनने की उम्मीद में दिल्ली में आलाकमान से संपर्क साध रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि सिद्धरमैया मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल के पक्ष में हैं, जबकि शिवकुमार चाहते हैं कि पहले नेतृत्व परिवर्तन पर स्पष्ट फैसला लिया जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस आलाकमान मंत्रिमंडल फेरबदल को मंजूरी देता है, तो यह संकेत माना जाएगा कि सिद्धरमैया ही अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। इससे शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं को बड़ा झटका लग सकता है।
दलित मुख्यमंत्री की भी हो रही मांग
पार्टी के भीतर सामाजिक समीकरण भी इस विवाद को जटिल बना रहे हैं। सिद्धरमैया के करीबी माने जाने वाले एएचआईएनडीए (अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित) खेमे के नेता चाहते हैं कि यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है तो उनके गुट के किसी नेता को मौका मिले। वहीं कुछ नेताओं द्वारा “दलित मुख्यमंत्री” की मांग भी उठाई जा रही है। इस संदर्भ में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और गृह मंत्री जी परमेश्वर के नामों की भी चर्चा हो रही है।
भाजपा भी घेर रही
उधर भाजपा ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा नेताओं के 2028 चुनाव में सत्ता में वापसी के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने कहा कि 2028 में भी कांग्रेस सरकार ही सत्ता में होगी। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 चुनाव से पहले भाजपा ने भारी बहुमत का दावा किया था, लेकिन कांग्रेस ने 136 सीटें जीतकर सरकार बनाई।
