Karnataka CM post Row: पिछले कुछ दिनों से कर्नाटक में सीएम पद को लेकर सियासी उठापटख चल रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता को लेकर खींचातान की खबरों की चर्चा देशभर में हो रही थी। नतीजतन कांग्रेस आलाकमान को हस्तक्षेप करना पड़ा। दोनों दिग्गज नेता ने सुबह के नाश्ते की टेबल पर मिले और तकरार को खत्म करने की कोशिश की।
हालांकि, मीडिया से बातचीत करते हुए डीके शिवकुमार ने सीएम कुर्सी को लेकर सिद्धारमैया और उनके बीच किसी प्रकार के खींचातान से इनकार किया।
रविवार को उन्होंने कहा कि दिल्ली दौरे के दौरान वह कभी भी अपने साथ विधायकों को नहीं ले गए और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर फैल रही अटकलें निराधार हैं।
मैं एक भी विधायक लेकर दिल्ली नहीं गया: डीके शिवकुमार
शिवकुमार ने बेंगलुरु में पत्रकारों से कहा,"हमारे बीच कभी मतभेद थे ही नहीं। मैं जब भी दिल्ली गया, अपने साथ एक भी विधायक नहीं ले गया। मैं चाहता तो 10–12 विधायक ले जा सकता था, लेकिन उसका कोई मतलब नहीं होता।”
उन्होंने खुद को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष होने के नाते पार्टी के सभी नेताओं का “पिता समान” बताया। उन्होंने कहास“सभी 140 विधायक मेरे लिए समान हैं। मैं किसी में भेदभाव नहीं करता। मेरा किसी से कोई मतभेद नहीं है।"
'मैंने कांग्रेस-JDS गठबंधन को बचाने की कोशिश की थी'
शिवकुमार ने याद दिलाया कि 2018 में एच.डी. कुमारस्वामी की एक साल की सरकार के दौरान उन्होंने कांग्रेस–जद(S) गठबंधन को बचाने की पूरी कोशिश की थी। “यह बात मैं और ऊपरवाला जानते हैं,” उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुमारस्वामी और उनके पिता व पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा भी इस प्रयास से वाकिफ हैं।
कुमारस्वामी के आरोप पर क्या बोले डीके शिवकुमार
बता दें कि कुमारस्वामी ने डीके शिवकुमार पर सत्ता संघर्ष के बीच साधु-संतों का समर्थन मांगने का आरोप लगाया था। कुमारस्वामी के इस आरोप पर डिप्टी सीएम ने कहा, “मैंने किसी से कुछ नहीं कहा। मैं सभी जातियों से प्रेम करता हूं। कई संतों ने मेरे पक्ष में बोला, लेकिन क्या मैंने उनसे ऐसा करने को कहा? यह उनका स्नेह और भरोसा है। इसे गलत कैसे कहूं?”
उन्होंने कहा कि वह पीछे से वार करने वाले नहीं, बल्कि “सामने से लड़ने वाले” व्यक्ति हैं। बीजेपी की आलोचना पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा,"बीजेपी तो किसी तरह बचने के लिए कुछ भी कह सकती है। क्या हमें उन्हें गंभीरता से लेना चाहिए?”
शिवकुमार ने बताया कि वह दिल्ली में सभी दलों की बैठक बुलाना चाहते हैं, ताकि किसानों की समस्या, मेकेदाटु बैलेंसिंग रिज़र्वायर परियोजना और राज्य से जुड़े अन्य मुद्दों को 1 दिसंबर से शुरू होने वाले संसद सत्र में प्रभावी ढंग से रखा जा सके।
