बेंगलुरु: मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने सोमवार को अपने कार्यकाल का पहला बड़ा कैबिनेट विस्तार करते हुए 20 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मंत्रिमंडल विस्तार को मंजूरी देने के बाद राजभवन में आयोजित समारोह में सभी नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही राज्य की मंत्रिपरिषद अब मुख्यमंत्री सहित संविधान द्वारा निर्धारित 34 सदस्यों की पूर्ण क्षमता तक पहुंच गई है।
इस मंत्रिमंडल विस्तार में 12 नए चेहरों को पहली बार मंत्री बनाया गया है,जबकि 8 पूर्व मंत्री दोबारा कैबिनेट में शामिल किए गए हैं। नई टीम में गायत्री शांतिगौड़ा एकमात्र महिला मंत्री हैं।
इन नेताओं ने ली मंत्री पद की शपथ
नए मंत्रियों में पी. एम. नरेंद्रस्वामी, शिवराज तंगडगी, रुद्रप्पा लामानी, के. एस. बसवन्थप्पा, बी. नागेंद्र, टी. रघुमूर्ति, बी. जेड. जमीर अहमद खान, रिजवान अरशद, संतोष लाड, मधु बंगारप्पा, सी. पुट्टरंगशेट्टी, एस. एस. मल्लिकार्जुन, डॉ. अजय सिंह, एन. चालुवरायस्वामी, के. एम. शिवलिंगे गौड़ा, एच. सी. बालकृष्ण, गायत्री शांतिगौड़ा, बसवराज रायरेड्डी, विजयानंद काशप्पनावर और लक्ष्मण सावदी शामिल हैं।हाईकमान ने तय किए नाम
कैबिनेट विस्तार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी हाईकमान ने मंजूरी दी थी। इसी के साथ जी.एस. पाटिल को कर्नाटक विधानसभा का नया स्पीकर, ए. एस. पोन्नन्ना को डिप्टी स्पीकर, सलीम अहमद को विधान परिषद का सभापति और उमाश्री को उपसभापति नियुक्त किया गया।
शपथ के बाद क्या बोले नए मंत्री?
मंत्री पद की शपथ लेने के बाद एन.चालुवरायस्वामी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। वहीं पी. एम. नरेंद्रस्वामी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता सरकार को मजबूत करना और 2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की दोबारा सरकार बनाना होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी का सपना 2029 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना है।
जमीर अहमद और नागेंद्र की वापसी पर नजर
कैबिनेट विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा बी. जेड. जमीर अहमद खान और बी. नागेंद्र की वापसी को लेकर रही। दोनों ही सिद्धारमैया सरकार में मंत्री थे। जमीर अहमद खान पहले सिद्धारमैया सरकार में आवास, वक्फ और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रह चुके हैं। हाल ही में दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव के दौरान कथित ऑडियो विवाद में उनका नाम सामने आया था, जिसे उन्होंने एआई से तैयार 'फर्जी ऑडियो' बताते हुए राजनीतिक साजिश करार दिया था।वहीं बी. नागेंद्र की वापसी भी अहम मानी जा रही है। वे पहले अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री थे, लेकिन वाल्मीकि विकास निगम फंड घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग जांच के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में ईडी ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था और सीबीआई ने कथित ₹89 करोड़ के फंड डायवर्जन मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बावजूद उन्हें दोबारा कैबिनेट में जगह मिली है।
इन नेताओं को पहली बार मिला मंत्री बनने का मौका
नई कैबिनेट में रिजवान अरशद, के. एस. बसवन्थप्पा, विजयानंद काशप्पनावर, के. एम. शिवलिंगे गौड़ा, टी. रघुमूर्ति और डॉ. अजय सिंह जैसे कई नेताओं को पहली बार मंत्री बनने का अवसर मिला है। वहीं लक्ष्मण सावदी, जो भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे, पहली बार कांग्रेस सरकार में मंत्री बने हैं।
कैबिनेट विस्तार से पहले दो विधायकों का इस्तीफा
कैबिनेट विस्तार से ठीक पहले कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल और बेलूर गोपालकृष्ण ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। दोनों नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने के बाद यह फैसला लिया गया।
