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जोशीमठ के बाद कर्ण प्रयाग, कमजोर हिमालय नहीं संभाल पा रहा है बोझ,लंबी हो सकती है लिस्ट

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Jan 10, 2023, 03:49 PM IST

Joshimath in Danger: हिमालय दुनिया की सबसे नई पर्वत श्रृंखला है। इसकी वजह से यह सबसे कमजोर पर्वत श्रंखलाओं में भी शामिल हैं। हिमालय भारतीय तथा यूरेशियन प्लेट के टकराव से बना है। हिमालय और हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला मं करीब 54,000 ग्लेशियर हैं।

Joshimath in Danger: अभी जोशीमठ के हजारों लोगों के ऊपर से संकट टला नहीं कि एक और शहर में वैसे ही हालात शुरू हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार चमोली जिले के कर्णप्रयाग के 50 घरों में दरारें देखी गईं हैं। बदरीनाथ हाईवे के किनारे बसे कर्ण प्रयाग के मकानों में भी कई फीट तक दरारें पड़ गई हैं जिस कारण कई परिवार अपने घर छोड़ चुके हैं। जबकि कई परिवार खौफ के साये में टूटे मकानों में रहने को मजबूर हैं। जोशीमठ, कर्ण प्रयाग जैसे शहरों की लिस्ट क्या लंबी हो सकती है, हिमालय क्या हमें बड़े संकेत दे रहा हैं, ये सवाल हैं, जिनके जवाब हिमालय के जन्म में ही छुपे हुए हैं..

सबसे नई पर्वत श्रृंखला

हिमालय दुनिया की सबसे नई पर्वत श्रृंखला है। इसकी वजह से यह सबसे कमजोर पर्वत श्रंखलाओं में भी शामिल हैं। हिमालय भारतीय तथा यूरेशियन प्लेट के टकराव से बना है। हिमालय और हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला मं करीब 54,000 ग्लेशियर हैं। और उनके जरिए हमारी नदियों को पानी मिलता है। लेकिन पिछले कुछ समय जलवायु परिवर्तन के कारण, बर्फबारी और वर्षा के पैटर्न बदलने से पहाड़ अधिक कमजोर होते जा रहे हैं। और ग्लेशियर पिघलते जा रहे हैं। जिसकी वजह से भूस्खलन, भूकंप और बाढ़ का खतरा इस इलाके में बढ़ता जा रहा है। साल 2018 में जलवायु परिवर्तन पर IPCC की रिपोर्ट में कहा गया था कि ग्लेशियरों के पिघलने से पहाड़ के ढलान की स्थिरता और बुनियादी कमजोर हुए हैं। जिसका असर भूस्खलन और भूकंप के रूप में दिख रहा है।

जोशीमठ ग्लेशियर फटने का बना था गवाह

अभी अपने अस्तित्व का संकट झेल रहा जोशीमठ फरवरी 2021 में एक और प्राकृतिक त्रासदी झेल चुका था। उस समय जोशीमठ से 25 किलोमीटर दूर ग्लेशियर फट गया था। और उसमें करीब 10 लोगों की मौत हो गई थी। इसकी वजह से तोपवन और ऋषि गंगा पॉवर प्रोजेक्ट को बड़ा नुकसान हुआ था। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की 2022 में आई रिपोर्ट के अनुसार जोशीमठ की धरती भूस्खलन के मैटेरियल से बनी हुई है। जो कि अस्थायी है। ऐसे में भारी वर्षा, अवैध निर्माण आदि ने परिस्थितियां बिगाड़ दी हैं।

उत्तराखंड में सिस्मिक जोन 5 में रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी आते हैं। वहीं नैनीताल जोन 4 में आता है। जबकि टिहरी और देहरादून दोनों ही जोन के तहत आते हैं। जाहिर है कि अगर जोशीमठ से सबक नहीं लिया गया तो दूसरे संवेदनशील शहरों का भी हाल वैसा ही हो सकता है।

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प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तव author

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम कर... और देखें

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