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कंगना रनौत ने विक्रमादित्य सिंह पर कसा तीखा तंज; बोलीं- 'राजा बाबू' लोकसभा की हार...

Himachal Pradesh: कंगना रनौत ने हिमाचल सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता विक्रमादित्य सिंह पर तीखा तंज कसा है। मंडी से भाजपा सांसद ने कहा है 'राजा बाबू' लोकसभा की हार को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। कंगना यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने उनकी मांग और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह पर भी जुबानी प्रहार किया।

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विक्रमादित्य सिंह को कंगना रनौत ने सुनाई खरी-खोटी।

Kangana Ranaut Slams Vikramaditya Singh: अभिनेत्री से राजनीतिक नेता बनीं कंगना रनौत ने रविवार को हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह अब भी लोकसभा चुनाव में अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पाए हैं। मंडी से सांसद रनौत ने विक्रमादित्य सिंह और उनकी मां तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह पर परोक्ष हमला करते हुए कहा कि राजनीति में प्रतिस्पर्धा होती है, लेकिन सीमाएं नहीं लांघी जानी चाहिए।

‘राजा बाबू’ चुनावी हार स्वीकार नहीं कर पा रहे- कंगना रनौत

कंगना ने कहा कि किसी को बार-बार दूसरों पर कीचड़ नहीं उछालना चाहिए और न ही अभद्र भाषा का प्रयोग करना चाहिए। रनौत ने मंडी में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि विक्रमादित्य सिंह ‘राजा बाबू’ होने के कारण लोकसभा चुनाव में अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह पूर्ववर्ती रामपुर रियासत के राजपरिवार के सदस्य हैं।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह पर भी कंगना रनौत ने कसा तंज

कंगना रनौत ने कहा कि मंडी की पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह और उनके परिवार ने पिछले 40 सालों से इस क्षेत्र पर ‘शासन’ किया, लेकिन क्षेत्र में सांसद निधि का एक रुपया खर्च नहीं कर सके। उन्होंने प्रतिभा सिंह पर आरोप लगाया कि वह लोकसभा में एक बार भी क्षेत्र के लोगों का पक्ष रखने में विफल रहीं। रनौत ने मंडी के विकास के लिए अपने दृष्टिकोण और चुनौतियों को साझा करते हुए कहा कि रेलवे, बिजली और संचार जैसे बुनियादी मुद्दे उठाए जा रहे हैं।

भाजपा सांसद ने कहा कि मंडी विशाल और विविध भौगोलिक क्षेत्र वाला है और इसमें विकास की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन मंडी को प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भरमौर और पांगी जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में परिवहन और संचार सुविधाएं अब भी पर्याप्त नहीं हैं। रनौत ने कहा कि इन क्षेत्रों के लिए सुरंगों और सभी मौसम के लिए उपयुक्त सड़कों के निर्माण की लंबे समय से मांग की जा रही है और इन मुद्दों को संसद में उठाया जा रहा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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