Jharkhand BJP: झारखंड में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। बीजेपी के एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने हेमंत सोरन की पार्टी का हाथ थाम लिया है। मिली जानकारी के अनुसार झारखंड बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष ताला मरांडी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) में शामिल हो गए हैं।
हेमंत सोरेन ने पार्टी में कराया शामिल
साहिबगंज जिले के बरहेट में हूल क्रांति के नायक सिदो-कान्हू की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में वह झामुमो में शामिल हुए। सोरेन ने पार्टी का पटका पहनाकर उनका स्वागत किया। इस मौके पर राजमहल लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय हांसदा और विधायक कल्पना सोरेन सहित झामुमो के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। जेएमएम ने ताला मरांडी के पार्टी में शामिल होने पर एक्स पर एक पोस्ट में कहा- "भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और बोरियो के पूर्व विधायक श्री ताला मरांडी जी का अपने समर्थकों के साथ झामुमो परिवार में हार्दिक स्वागत और जोहार।"
कौन हैं ताला मरांडी
ताला मरांडी वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में राजमहल सीट से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी रहे थे। इस चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह संथाल परगना की बोरियो सीट से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया।
पहले रह चुके हैं विधायक
ताला मरांडी पूर्व में बोरियो सीट से भाजपा के विधायक रह चुके हैं। यह दूसरी बार है, जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी छोड़ी है। इसके पहले वर्ष 2019 में झारखंड विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वे बीजेपी छोड़कर आजसू पार्टी में शामिल हुए थे। इसके बाद वह आजसू के टिकट पर बोरियो से विधानसभा चुनाव भी लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
क्यों दिया इस्तीफा
ताला मरांडी ने 10 अप्रैल की शाम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को इस्तीफे का पत्र भेजा था। हालांकि, इसकी खबर 11 अप्रैल को सार्वजनिक हुई। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा था, “मैं, ताला मरांडी, भारतीय जनता पार्टी का एक समर्पित सदस्य रहा हूं। पार्टी द्वारा दिए गए अवसरों के लिए मैं आभार प्रकट करता हूं। वर्तमान परिस्थितियों, व्यक्तिगत कारणों एवं वैचारिक मतभेदों के चलते मैंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता तथा सभी पदों से त्यागपत्र देने का निर्णय लिया हूं। मेरा यह निर्णय गहन विचार-विमर्श के पश्चात लिया गया है और इसमें किसी प्रकार की दुर्भावना नहीं है। कृपया मेरे त्यागपत्र को स्वीकार करते हुए मुझे मुक्त किया जाए।”
