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ED Raids: झारखंड में IAS विनय चौबे समेत कई प्रशासनिक असफरों के घर पर छापेमारी, शराब घोटाले में ED का एक्शन

ED Raid Against IAS Vinay Chaubey: छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में IAS विनय चौबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर के आधार पर ईडी छापेमारी कर रही है। इसके अलावा झारखंड में अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के यहां भी ईडी की टीम पहुंची है।

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झारखंड में ईडी की बड़ी छापेमारी।

Photo : ANI

ED Raid Against IAS Vinay Chaubey: झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा एक्शन लिया है। जानकारी के मुताबिक, ईडी की टीम ने आबकारी विभाग के पूर्व सचिव आईएएस अधिकारी विनय चौबे के घर पर छापेमारी की है। इसके अलावा कई अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के घर पर भी ईडी की टीम पहुंची है। यह छापेमारी शराब घोटाले से जुड़े एक मामले में की जा रही है। बता दें, छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में IAS विनय चौबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर के आधार पर ईडी छापेमारी कर रही है।

अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ पुलिस के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की प्राथमिकी पर संज्ञान लेते हुए संघीय जांच एजेंसी के झारखंड कार्यालय द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद रांची और रायपुर में 15 परिसरों पर छापे मारे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि झारखंड काडर के आईएएस अधिकारी चौबे, राज्य सरकार के अधिकारी गजेंद्र सिंह, शराब व्यापारियों और उनसे जुड़े लोगों के परिसरों की तलाशी ली जा रही है। चौबे राज्य में 2022 की आबकारी नीति के कार्यान्वयन के दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रधान सचिव थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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