जूनागढ़: गुजरात के बहुचर्चित धारा कड़ीवार हत्याकांड में करीब चार साल बाद न्याय की प्रक्रिया अपने निर्णायक मुकाम पर पहुंची। जूनागढ़ की 5वीं अतिरिक्त सत्र अदालत ने सत्र वाद संख्या 61/2023 में फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी सूरज उर्फ भुवाजी लाखाभाई सोलंकी समेत पांच आरोपियों को हत्या, आपराधिक साजिश और सबूत नष्ट करने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि 30 दिन के भीतर जुर्माना जमा नहीं किया जाता है तो उन्हें एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी दोषी फिलहाल जेल में बंद हैं, इसलिए अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फैसला सुनाया।
पांच दोषी करार,तीन आरोपियों को बरी किया गया
अदालत ने सूरज उर्फ भुवाजी लाखाभाई सोलंकी, गुंजन जितेंद्रभाई जोशी, मित आनंदभाई शाह, युवराज लाखाभाई सोलंकी और मुकेश बीजलभाई सोलंकी को दोषी करार दिया। वहीं संजयभाई महेशभाई सोहेलिया, जुगलबाई आनंदभाई शाह और मोनाबेन आनंदभाई शाह को साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
लिव-इन रिलेशनशिप से शुरू हुआ विवाद,हत्या तक पहुंची कहानी
अभियोजन के अनुसार, 22 वर्षीय धारा विनोदभाई कड़ीवार का मुख्य आरोपी सूरज भुवाजी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप था। दोनों के बीच संबंधों में लगातार तनाव बना रहता था। 24 फरवरी 2022 को धारा ने सूरज के खिलाफ जुनागढ़ बी-डिवीजन पुलिस स्टेशन में दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। बाद में 25 अप्रैल 2022 को दोनों के बीच मैत्री एग्रीमेंट हुआ और वे फिर साथ रहने लगे।हालांकि, विवाद खत्म नहीं हुआ। धारा शादी और आर्थिक सहयोग की मांग कर रही थी, जबकि सूरज पहले से शादीशुदा था। अभियोजन के मुताबिक, इसी कारण सूरज ने धारा को अपने जीवन से हटाने की योजना बनाई।
अहमदाबाद ले जाने का बहाना, सुनसान फार्म पर की हत्या
18 जून 2022 को सूरज ने अपने साथियों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। अगले दिन धारा को यह कहकर कार में बैठाया गया कि दुष्कर्म मामले के समझौते के लिए अहमदाबाद हाईकोर्ट जाना है। रास्ते में यह कहकर वाहन सुरेंद्रनगर जिले के सायला तालुका के वांतावच गांव स्थित खेत पर ले जाया गया कि वहां से वकील की फीस के लिए पैसे लेने हैं।
रात करीब 11 बजे खेत पर पहुंचने के बाद पहले से मौजूद अन्य आरोपी भी वहां आ गए। अभियोजन के अनुसार, कार के भीतर धारा का दुपट्टे से गला घोंटा गया और उसकी सांस रुकने तक हमला जारी रखा गया। कुछ ही मिनटों में उसकी मौत हो गई।
शव जलाकर मिटाए गए सबूत
हत्या के बाद आरोपियों ने शव को गद्दे में लपेटकर खेत के एक सूखे तालाब तक पहुंचाया। वहां लकड़ियां और सूखी घास इकट्ठी कर शव पर पेट्रोल छिड़का गया और आग लगा दी गई। पुलिस जांच में बाद में इसी स्थान से जली हुई हड्डियां और अन्य अवशेष बरामद हुए।
पुलिस को गुमराह करने के लिए रची गई थी पूरी साजिश
हत्या के बाद आरोपियों ने मामले को गुमशुदगी का रूप देने की कोशिश की। धारा के मोबाइल फोन से फर्जी व्हाट्सएप संदेश भेजे गए, जिनमें यह दिखाने का प्रयास किया गया कि वह अपनी मर्जी से कहीं चली गई है। मोबाइल फोन को बाद में मुंबई ले जाकर समुद्र में फेंक दिया गया। आरोपियों ने खुद पुलिस में धारा के लापता होने की सूचना भी दी ताकि जांच की दिशा बदल सके।
भाई की जिद और तकनीकी जांच से खुला राज
30 अगस्त 2022 को धारा के भाई मित विनोदभाई कड़ीवार ने बहन के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। मामला लंबे समय तक गुमशुदगी के रूप में चलता रहा, लेकिन परिवार लगातार पुलिस पर जांच का दबाव बनाता रहा। बाद में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल टावर लोकेशन, डिजिटल ट्रैकिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से पता चला कि घटना वाली रात सभी मुख्य आरोपियों की लोकेशन एक ही स्थान पर थी। इसके बाद पूछताछ में मामले की कड़ियां जुड़ती गईं और पुलिस ने हत्या का पूरा घटनाक्रम उजागर कर दिया। जांच के दौरान घटनास्थल से मानव अवशेष भी बरामद किए गए, जिन्हें फोरेंसिक जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया।
तीन साल तक चली सुनवाई के बाद आया फैसला
पुलिस ने अगस्त 2023 में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद गवाहों, वैज्ञानिक साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर अदालत में सुनवाई चली। अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने 15 जुलाई 2026 को फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 120-बी (आपराधिक साजिश) और 201 (सबूत नष्ट करना) के तहत दोषी ठहराया।
करीब चार वर्षों तक चले इस चर्चित मामले में अदालत के फैसले के साथ धारा कड़ीवार हत्याकांड का कानूनी अध्याय निर्णायक रूप से समाप्त हुआ। अभियोजन पक्ष ने इसे सुनियोजित हत्या के मामले में महत्वपूर्ण फैसला बताया है।
