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हेमंत सोरेन ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, 28 नवंबर को लेंगे शपथ

Hemant Soren: राज्यपाल से मुलाकात के बाद हेमंत सोरेन ने बताया कि मैंने सरकार बनाने का दावा पेश किया है और राज्यपाल को गठबंधन सहयोगियों का समर्थन पत्र सौंप दिया है। उन्होंने हमें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। शपथ ग्रहण समारोह 28 नवंबर को होगा।

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हेमंत सोरेन ने पेश किया सरकार बनाने का दावा।

Hemant Soren: झामुमो नेता हेमंत सोरेन ने रविवार को झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। वह 28 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इससे पहले दिन में राज्य में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने सर्वसम्मति से हेमंत सोरेन को विधायक दल का नेता चुना। इसके बाद सोरेन अन्य नेताओं के साथ राजभवन पहुंचे और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने सरकार बनाने का भी दावा पेश किया।

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सोरेन ने कहा, मैंने सरकार बनाने का दावा पेश किया है और राज्यपाल को गठबंधन सहयोगियों का समर्थन पत्र सौंप दिया है। उन्होंने हमें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। शपथ ग्रहण समारोह 28 नवंबर को होगा। माना जा रहा है कि हेमंत सोरेन 10 मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।

लगातार दूसरी बार हासिल की जीत

हेमंत सोरेन की झामुमो नीत गठबंधन ने शनिवार को झारखंड में शानदार जीत हासिल करते हुए लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की। ‘इंडिया’ गठबंधन ने 81 सदस्यीय विधानसभा में 56 सीट जीती हैं। हालांकि, भाजपा नीत राजग को भारी महज 24 सीट मिलीं। राज्य विधानसभा में बहुमत के लिए 41 सीट की जरूरत होती है। सोरेन झारखंड के 14वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। झारखंड का गठन 15 नवंबर 2000 को हुआ था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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