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जातिगत जनगणना पर JDU ने फिर दिया BJP को झटका, संसदीय समिति की बैठक में विपक्ष के सुर में मिलाए सुर

Caste Census: सूत्रों ने बताया कि संसदीय समिति की बैठक में जनता दल (यू) सदस्य गिरधारी यादव चाहते थे कि समिति द्वारा चर्चा के लिए जाति आधारित जनगणना मुद्दा को सूचीबद्ध किया जाए। तृणमूल कांग्रेस के सदस्य कल्याण बनर्जी ने उनका समर्थन किया। कल्याण बनर्जी ने मांग की कि समिति जाति आधारित जनगणना कराए जाने के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखे।

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जदयू नेता व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

Caste Census: जातिगत जनगणना के मुद्दे को भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। नरेंद्र मोदी सरकार में सहयोगी दल जदयू ने इस मुद्दे पर विपक्ष का साथ दिया है और पूरे देश में जातिगत जनगणना की मांग उठाई है। गुरुवार को जदयू ने विपक्ष के सुर में सुर मिलाते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण संबंधी संसदीय समिति में चर्चा के लिए जाति आधारित जनगणना को विषय के रूप में शामिल करने की मांग की।

सूत्रों ने बताया कि जनता दल (यू) सदस्य गिरधारी यादव चाहते थे कि समिति द्वारा चर्चा के लिए जाति आधारित जनगणना मुद्दा को सूचीबद्ध किया जाए। बता दें, इससे पहले जदयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी जातिगत जनगणना की वकालत कर चुके हैं। आरजेडी के साथ अपने कार्यकाल में उन्होंने अपने राज्य में जाति आधारित सर्वेक्षण का आदेश दिया था और इसके निष्कर्ष पिछले साल सार्वजनिक किए गए थे।

डीएमके ने उठाया जातिगत जनगणना का मुद्दा

संसदीय समिति की बैठक में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के सदस्य टीआर बालू ने यह मुद्दा उठाया। भाजपा सदस्य गणेश सिंह इस समिति के अध्यक्ष हैं। संसद सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस सदस्य मणिकम टैगोर चाहते थे कि समिति चर्चा के लिए सबसे पहले विषय के रूप में जाति आधारित जनगणना को सूचीबद्ध करे। तृणमूल कांग्रेस के सदस्य कल्याण बनर्जी ने उनका समर्थन किया। कल्याण बनर्जी ने मांग की कि समिति जाति आधारित जनगणना कराए जाने के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखे। वहीं, भाजपा के एक सदस्य ने कहा कि आरक्षण के दायरे में अनुबंध और अस्थायी आधार पर की जाने वाली भर्तियां और तदर्थ नियुक्तियों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

राहुल गांधी भी उठा चुके हैं मांग

बता दें, देश में जातिगत जनगणना का मुद्दा विपक्ष जोर-शोर से उठा रहा है। इसमें कांग्रेस सबसे आगे है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी कई बाद जातिगत जनगणना के मुद्दे को उठा चुके हैं। उन्होंने तो यहां तक कहा है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर देश में जातिगत जनगणना कराई जाएगी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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