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GK: 15 साल की मेहनत और इंजीनियरिंग का कमाल, देश की कहां बनकर तैयार हुई देश की सबसे लंबी 'जल सुरंग'

General Knowledge: मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद में देश की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग का निर्माण पूरा हो गया है। करीब 15 से 17 साल की मेहनत, कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों और आधुनिक तकनीक के बाद तैयार हुई यह सुरंग अब नर्मदा के पानी को विंध्य क्षेत्र तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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भारत की सबसे लंबी वॉटर सुरंग

General Knowledge: भारत में इंजीनियरिंग की एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद में देश की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग का निर्माण पूरा हो गया है। करीब 15 से 17 साल की मेहनत, कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों और आधुनिक तकनीक के बाद तैयार हुई यह सुरंग अब नर्मदा के पानी को विंध्य क्षेत्र तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी। लगभग 11.95 किलोमीटर लंबी स्लीमनाबाद जल सुरंग को देश की सबसे लंबी सिंचाई जल सुरंगों में शामिल किया जा रहा है।

इस सुरंग को सिर्फ एक जल परियोजना नहीं, बल्कि भारतीय इंजीनियरिंग और लंबी अवधि की योजना का उदाहरण माना जा रहा है। 15 साल की मेहनत के बाद पहाड़ के नीचे बनी यह सुरंग अब नर्मदा के पानी को हजारों गांवों और लाखों हेक्टेयर जमीन तक पहुंचाने का रास्ता तैयार कर चुकी है।

इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसके जरिए नर्मदा का पानी बिना पंप या लिफ्ट के गुरुत्वाकर्षण के सहारे आगे पहुंच सकेगा। यानी पानी को ऊपर उठाने के लिए लगातार भारी बिजली खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। इस सुरंग के जरिए नर्मदा नदी का पानी विंध्य क्षेत्र के बड़े हिस्से तक पहुंचाने की योजना है।

किसे होगा फायदा

इस परियोजना का सीधा फायदा मध्य प्रदेश के विंध्य और आसपास के इलाकों को मिलने की उम्मीद है। इससे जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जैसे जिलों में सिंचाई सुविधा को मजबूती मिलेगी। परियोजना से करीब 1,450 गांवों और 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिलने का अनुमान है। यानी जिन इलाकों में पानी की कमी के कारण खेती प्रभावित होती थी, वहां अब सिंचाई की नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

कब मिली थी मंजूरी

लेकिन इस सुरंग का निर्माण बिल्कुल आसान नहीं था। परियोजना को मंजूरी वर्ष 2008 में मिली थी और निर्माण कार्य 2011 में शुरू हुआ। सुरंग को जमीन से करीब 30 मीटर नीचे जर्मनी की अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन यानी TBM की मदद से तैयार किया गया। पहाड़ों के भीतर सुरंग बनाने के दौरान कई तकनीकी चुनौतियां सामने आईं। शुरुआत में इस्तेमाल की गई अमेरिकी मशीनें कठोर चट्टानों के सामने टिक नहीं पाईं। इसके बाद जर्मन तकनीक की मदद से निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया गया।

Kuldeep Raghav
कुलदीप राघवauthor

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर की गहरी समझ और लगातार फील्ड-ओरिएंटेड रिपोर्टिंग के कारण कुलदीप इस बीट के भरोसेमंद पत्रकारों में गिने जाते हैं। वे स्कूल और उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, एडमिशन और काउंसलिंग प्रोसेस, स्कॉलरशिप, करियर गाइडेंस, जॉब अलर्ट, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पब्लिश करते हैं। कुलदीप ने अब तक 18,000 से अधिक बाइलाइन स्टोरीज लिखी हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, विश्लेषण, डेटा आधारित रिपोर्ट्स और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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