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जम्मू कश्मीर में बिहार निवासी की गोली मारकर हत्या, CM उमर अब्दुल्ला ने जताया दुख

Target Killing in Jammu Kashmir: जम्मू कश्मीर के शोपियां जिले के जैनपोरा क्षेत्र के वंडुना गांव में बिहार निवासी अशोक चौहान का गोलियों से छलनी शव बरामद किया गया है। इससे पहले 8 अप्रैल को शोपियां जिले में आतंकवादियों ने एक भोजनालय में घुसकर पंजाब के एक टैक्सी चालक परमजीत सिंह पर गोली चलाई, जो विदेशी पर्यटकों के साथ था। गाइड को तीन गोलियां लगीं। इससे पहले फरवरी में, श्रीनगर के पुराने शहर में आतंकवादियों ने पंजाब के दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

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जम्मू कश्मीर में बिहार निवासी की हत्या पर सीएम अब्दुल्ला ने जताया दुख।

Photo : BCCL

Target Killing in Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर में नई सरकार के गठन के बाद भी टारगेट किलिंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार को शोपियां जिले में बिहार निवासी श्रमिक की गोली मारकर कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया कि शोपियां जिले के जैनपोरा क्षेत्र के वंडुना गांव में बिहार निवासी अशोक चौहान का गोलियों से छलनी शव बरामद किया गया। पुलिस ने कहा, शव को चिकित्सकीय-कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए भेज दिया गया है। इस घटना में मामला दर्ज कर जांच जारी है। पुलिस ने पुष्टि की है कि यह आतंकवादी कृत्य है। हत्यारों का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है।

उधर, जम्मू कश्मीर के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अशोक चौहान की हत्या पर दुख जताया है। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, दक्षिण कश्मीर में आतंकवादियों के हाथों अशोक चौहान की मौत की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। ये हमले घृणित हैं और इनकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। मैं मृतक के परिवार और प्रियजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं।

नहीं रुक रही टारगेट किलिंग

बता दें, कश्मीर घाटी में राजमिस्त्री, बढ़ई, धान काटने वाले तथा विभिन्न श्रम-प्रधान व्यवसायों में लगे अन्य लोगों पर पहले भी आतंकवादियों द्वारा हमले किए गए हैं। इस साल 8 अप्रैल को शोपियां जिले में आतंकवादियों ने एक भोजनालय में घुसकर पंजाब के एक टैक्सी चालक परमजीत सिंह पर गोली चलाई, जो विदेशी पर्यटकों के साथ था। गाइड को तीन गोलियां लगीं। इससे पहले फरवरी में, श्रीनगर के पुराने शहर में आतंकवादियों ने पंजाब के दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

दो दिन पहले ही गठित हुई है नई सरकार

जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली निर्वाचित सरकार के सत्ता में आने के दो दिन बाद ब‍िहार न‍िवासी व्यक्ति पर आतंकवादी हमला हुआ है। जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और औसतन 68 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने के बाद यह जम्मू-कश्मीर में पहला विधानसभा चुनाव था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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