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जम्मू-कश्मीर के अखनूर में सेना के वाहन पर आतंकी हमला, सुरक्षाबलों ने की घेराबंदी

Ambush Attempted by Terrorist: जम्मू कश्मीर में अखनूर सेक्टर में आतंकियों ने घात लगाकर सेना के वाहन पर हमला किय। हालांकि, सुरक्षाबलों ने हमले को नाकाम कर दिया। घटना के बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

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आतंकियों ने सेना के वाहन को बनाया निशाना।

Photo : iStock

Ambush Attempted by Terrorist: जम्मू कश्मीर के अखनूर सेक्टर से बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां नियंत्रण रेखा के पास बट्टल गांव में आतंकियों ने सेना के वाहन को निशाना बनाया है। बताया जा रहा है कि आतंकियों ने घात लगाकर सेना के वाहन पर कुछ राउंड फायरिंग की। हालांकि, सुरक्षाबलों ने इसका कड़ा जवाब दिया, जिससे हमला विफल हो गया। यह घटना सुबह करीब 7 बजे की बताई जा रही है।

आतंकी हमले के बाद सेना ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस हमले में तीन अज्ञात आतंकवादियों की बात सामने आ रही है।

तीन से चार आतंकवादियों ने की फायरिंग

अभी तक की जानकारी के मुताबिक, बट्टल गांव में शिव मंदिर के पास घात लगाकर बैठे तीन से चार आतंकवादियों ने अचानक से सेना के काफिले पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद सेना के जवानों ने भी प्रतिक्रिया देते हुए मोर्चा संभाला। सेना की जवानों की ओर से फायरिंग शुरू होने के बाद आतंकी वहां से भाग निकले। अधिकारियों ने बताया कि आतंकी स्थानी शिव मंदिर के आसपास छिपे हो सकते हैं। ऐसे में पूरे इलाके को घेरकर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अभी तक इस हमले में किसी जवान के हताहत होने की खबर नहीं है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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