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जम्मू-कश्मीर: कुलगाम के देवसर में आतंकियों के साथ मुठभेड़ जारी, सुरक्षाबलों ने घेरा पूरा इलाका; 4 जवान और एक अधिकारी घायल

Jammu and Kashmir Encounter: कुलगाम के देवसर इलाके के अदिगम गांव में दो आतंकवादी छिपे हुए की सूचना थी। इसके बाद सेना और पुलिस ने तलाशी अभियान शुरू किया। इसी दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर हैवी फायरिंग शुरू कर दी।

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जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में एनकाउंटर जारी।

Photo : ANI

Jammu and Kashmir Encounter: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ की खबर है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया कि यहां के देवसर इलाके के अदिगम गांव में दो आतंकवादी छिपे हुए हैं। तलाशी अभियान के दौरान उनकी ओर से गोलीबारी शुरू हुई, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है।

भारतीय सेना ने बताया कि विशिष्ट खुफिया इनपुट के आधार पर, भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कुलगाम के अरिगम गांव में एक संयुक्त अभियान शुरू किया था, तलाशी के दौरान आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसके बाद सेना ने भी मोर्चा संभाल लिया। सूत्रों के मुताबिक, कुलगाम में चल रही मुठभेड़ में सेना के 4 जवान और जम्मू-कश्मीर पुलिस के 1 अतिरिक्त एसपी घायल हो गए हैं।

सेना ने पूरे इलाके को किया सील

सेना की ओर से बताया गया है कि पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और आतंकवादियों को जवाब दिया जा रहा है। इसके साथ ही लोगों को भी विशेष रूप से सावधान रहने ओर घटनाक्रम से दूर रहने की सलाह दी गई है।

मुठभेड़ में कई आतंकी हुए ढेर

आपको बताते चलें, हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच कई मुठभेड़ हुई हैं, इनमें कई आतंकवादी मारे गए हैं। 15 सितंबर को कठुआ जिले के बानी इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। पहले आतंकी गतिविधियां पुंछ और राजौरी जिलों तक ही सीमित थी। लेकिन, अब ये जम्मू के अन्य क्षेत्रों में फैल रही हैं। चिनाब घाटी, उधमपुर और कठुआ में भी आतंकी सक्रिय हैं। आतंकवादी वाहनों पर घात लगाकर हमला कर रहे हैं और ग्रेनेड, कवच-भेदी गोलियों के साथ-साथ एम4 असॉल्ट राइफलों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। कश्मीर में लगातार चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों ने आतंकवादियों को पहाड़ों की ओर धकेल दिया है, जहां वह छिप जाते हैं और सुरक्षा बलों पर हमले करने के लिए सही समय का इंतजार करते हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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