असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया है कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे पर सहमति बन चुकी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में 2023 के परिसीमन के बाद पहली बार चुनाव होने जा रहे हैं और कई सीटों की भौगोलिक सीमाएं बदल चुकी हैं।
NDA में कौन-कौन और उनकी मौजूदा ताकत
असम में NDA के प्रमुख दलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा),असम गण परिषद (एजीपी),यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ)शामिल हैं। राभा हासोंग जौथा संग्राम समिति (आरएचजेएसएस) और जनशक्ति पार्टी (जेपी) भी गठबंधन का हिस्सा हैं,हालांकि विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व नहीं है।
मौजूदा 126 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 64, एजीपी के 9, यूपीपीएल के 7 और बीपीएफ के 3 विधायक हैं। यानी सत्ता पक्ष की बढ़त स्पष्ट है, लेकिन परिसीमन के बाद बदली सीट संरचना ने समीकरण जटिल किए हैं।
परिसीमन क्यों बन गया चुनौती
दरअसल, 2023 में हुए परिसीमन के बाद सीटों की सीमाएं बदल गई हैं,कुछ अनारक्षित सीटें आरक्षित हुईं और कुछ आरक्षित सीटें अनारक्षित। इससे स्थानीय समीकरण और संभावित उम्मीदवारों के दावों में बदलाव आया है। ऐसे में NDA के भीतर तालमेल और सीट एडजस्टमेंट अहम हो गया था। ऐसे में अब मुख्यमंत्री बिस्वा सरमा का यह दावा संकेत देता है कि साझेदारों के बीच संभावित टकराव फिलहाल टल गया है।आगे की प्रक्रिया क्या
राज्य नेतृत्व संभावित उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देकर केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करेगा। इससे संकेत मिलता है कि सीट शेयरिंग पर सिद्धांततः सहमति के बाद अब उम्मीदवार चयन पर फोकस होगा।
असम विधानसभा में विपक्ष की स्थिति
वहीं, बात अगर विधानसभा में विपक्षी दलों की करें तो उनमें कांग्रेस के 26,ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के 15 और माकपा का 1 विधायक है,साथ ही एक निर्दलीय सदस्य भी है। परिसीमन के बाद विपक्ष भी अपनी रणनीति को नए सिरे से साधने की कोशिश में है।
