CBSE Class 12 OSM Controversy Update: सीबीएसई बोर्ड क्लास 12 के छात्रों के लिए जरूरी खबर है। दिल्ली हाईकोर्ट ने CBSE कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा में इस्तेमाल हुए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर दखल देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इसी तरह का मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट के सामने आ चुका है, इसलिए इस स्तर पर दोबारा हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।
OSM सिस्टम में गड़बड़ी को लेकर क्या था आरोप? यह PIL National Students’ Union of India (NSUI) के अध्यक्ष विनोद झाखड़ ने दाखिल की थी। इसमें कहा गया था कि डिजिटल तरीके से कॉपियां स्कैन करने और उनके मूल्यांकन की प्रक्रिया में कई तरह की तकनीकी परेशानियां सामने आईं। याचिका में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की शिकायतों का हवाला देते हुए कहा गया कि कुछ आंसर शीट धुंधली दिखाई दीं, कुछ पेज गायब थे या पूरी तरह अपलोड नहीं हुए। कुछ मामलों में आंसर बुक के पेज आपस में मेल नहीं खाने और उम्मीद से काफी कम अंक मिलने की शिकायतें भी सामने आईं।
NSUI ने प्रभावित छात्रों को अतिरिक्त अंक देने, स्वतंत्र जांच कराने और जरूरत पड़ने पर कॉपियों की मैनुअल जांच व फिजिकल वेरिफिकेशन की मांग की थी। संगठन ने CBSE के वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन पोर्टल को एक महीने और खोलने की मांग भी रखी थी।
बेंच ने क्या कहा
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि किसी छात्र की व्यक्तिगत आंसर शीट की स्कैनिंग, मूल्यांकन या री-वैल्यूएशन से जुड़ी शिकायत उसका व्यक्तिगत मामला है। ऐसे छात्र CBSE की तय प्रक्रिया के तहत अपनी शिकायत उठा सकते हैं या जरूरत पड़ने पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट का रुख कर सकते हैं। कोर्ट ने फिलहाल कक्षा 12 मूल्यांकन प्रक्रिया को PIL के जरिए दोबारा खोलने का रास्ता बंद कर दिया है।
CBSE की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और नया शैक्षणिक सत्र भी शुरू हो गया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने व्यापक स्तर पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
