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सत्य निकेतन हादसे के बाद सरकार सख्त; 45 दिन में कोचिंग सेंटर और PG के लिए नई पॉलिसी लाएगी दिल्ली सरकार

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार सख्त हो गई है। दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने कहा है कि 1 से 1.5 महीने के भीतर कोचिंग सेंटरों और PG को रेगुलेट करने के लिए नई पॉलिसी बनाई जाएगी।

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सत्य निकेतन हादसे के बाद सरकार सख्त

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद का कहना है कि डेढ़ महीने के अंदर एक व्यापक पॉलिसी और वेब पोर्टल के जरिए PG अकोमोडेशन और कोचिंग संस्थानों को रेगुलेट किया जाएगा। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को कहा कि सरकार शहर भर में PG अकोमोडेशन और कोचिंग संस्थानों को रेगुलेट करने के लिए अगले छह हफ्तों में एक व्यापक पॉलिसी और वेब पोर्टल लाएगी। सूद ने यह बात PG अकोमोडेशन में रहने वाले छात्रों से उनकी चिंताओं को समझने के लिए मुलाकात करने के बाद कही। यह मुलाकात सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के कुछ दिनों बाद हुई, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे।

सूद ने कहा, 'हम पहले से ही इस पर काम कर रहे थे, लेकिन इस दुखद घटना ने हमें गौबा कमेटी की रिपोर्ट (Gauba committee report) को लागू करने और एक पॉलिसी बनाने की प्रक्रिया तेज़ करने के लिए मजबूर कर दिया है।'

छात्रों को PG अकोमोडेशन के यूज़र्स के तौर पर अपनी चिंताएँ बताने के लिए बुलाया गया था

कहा कि DU के साउथ कैंपस और गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के तहत आने वाले प्रोफेशनल कॉलेजों के छात्रों को PG अकोमोडेशन के यूज़र्स के तौर पर अपनी चिंताएं बताने के लिए बुलाया गया था। उन्होंने बताया कि छात्रों ने किराया, PG ऑपरेटरों द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं, एग्रीमेंट लागू करने और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए। सूद ने कहा कि सरकार एक ऐसे सिस्टम पर विचार कर रही है जिसके तहत PG अकोमोडेशन की जानकारी, जैसे कि उनकी उपलब्धता, सुविधाएं और सुरक्षा नियम, एक कॉमन पोर्टल पर रजिस्टर की जा सकें।उन्होंने कहा, 'हो सकता है कि PG बिल्डिंग किसी एक व्यक्ति की हो, उसे कोई और चला रहा हो और पैसे कोई और ले रहा हो। एग्रीमेंट लागू करना और छात्रों से किए गए वादे के मुताबिक सुविधाएं देना एक बड़ी चिंता है।'

मंत्री ने कहा कि पॉलिसी को अंतिम रूप देने से पहले सरकार PG मैनेजमेंट, माता-पिता, एजेंसियों, छात्र संगठनों और पानी व बिजली से जुड़े विभागों सहित अन्य स्टेकहोल्डर्स से सलाह-मशविरा करेगी।उन्होंने कहा कि इसके बाद कैबिनेट के सामने रखने से पहले इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल के साथ चर्चा की जाएगी। सूद ने कहा, 'हम सभी स्टेकहोल्डर्स से सलाह-मशविरा करने के बाद एक से डेढ़ महीने के अंदर पॉलिसी को जनता के सामने लाने की कोशिश करेंगे।'उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून में PG अकोमोडेशन के लिए सुरक्षा और सुरक्षा मानकों को भी तय किया जाएगा।

सूद ने कहा कि सरकार शहर के बाहर से दिल्ली आने वाले छात्रों के लिए हॉस्टल अकोमोडेशन की कमी को दूर करने पर भी काम कर रही है।

उन्होंने कहा, 'शहर के बाहर से दो लाख से ज़्यादा छात्र यहां आते हैं और उन्हें हॉस्टल अकोमोडेशन की जरूरत होती है। इसमें बहुत बड़ा अंतर है।' उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान के तहत हॉस्टल्स के लिए मंज़ूर फ्लोर एरिया रेश्यो (FAR) पहले ही बढ़ा दिया गया है और सरकार ज़्यादा रहने की जगह बनाने के लिए और FAR के लिए केंद्र से मदद लेने को तैयार है।

बिल्डिंग प्लान की मंज़ूरी में तेज़ी लाकर DU हॉस्टल्स के रीडेवलपमेंट में भी मदद

उन्होंने कहा कि सरकार ज़्यादा FAR देकर और बिल्डिंग प्लान की मंज़ूरी में तेज़ी लाकर DU हॉस्टल्स के रीडेवलपमेंट में भी मदद करेगी।सूद ने कहा कि सरकारी और इंस्टीट्यूशनल हॉस्टल्स को बढ़ाने की कोशिशों के बावजूद, प्राइवेट प्लेयर्स की भूमिका बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि क्या नरेला में खाली पड़ी इमारतों का इस्तेमाल स्टूडेंट्स के रहने के लिए किया जा सकता है, और उन्हें एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स से जोड़ने के लिए बस सर्विस दी जा सकती है ताकि सुरक्षित माहौल मिल सके।

' सरकार स्टूडेंट्स के रहने की व्यवस्था और PG के रेगुलेशन पर काम कर रही थी'

सूद ने कहा कि सरकार सत्य निकेतन की घटना से पहले ही स्टूडेंट्स के रहने की व्यवस्था और PG के रेगुलेशन पर काम कर रही थी। उन्होंने कहा, 'सरकार इस दुखद घटना से पहले ही इन मुद्दों पर काम कर रही थी। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ यह कह रहा हूं, लेकिन इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने हमें इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए मजबूर किया है।' उन्होंने आगे कहा, 'हम इन PG को रेगुलेट भी करेंगे और उनके लिए सुरक्षा और बचाव के स्टैंडर्ड्स तय करने पर काम करेंगे।' मंत्री ने कहा कि पॉलिसी बनाते समय सरकार सभी स्टेकहोल्डर्स की चिंताओं का ध्यान रखेगी और स्टूडेंट्स के लिए ज़्यादा सुरक्षित रहने की जगह बनाने की दिशा में काम करेगी।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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