देश

ISRO ने रचा इतिहास, अंतरिक्ष में स्थापित की पहली सौर वेधशाला, सूरज के L1 प्वाइंट पर पहुंचा आदित्य एल-1

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 6, 2024, 06:31 PM IST

Aditya-L1 Mission Successful: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बताया कि भारत ने एक और उपलब्धि हासिल की। भारत की पहली सौर वेधशाला आदित्य-एल1 अपने गंतव्य तक पहुंच गई है।

Image

सूरज के पास पहुंचा आदित्य एल1

Aditya-L1 Mission Successful: भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने एक बार फिर से इतिहास रच दिया है। इसरो का पहला सूर्य मिशन आदित्य एल1 सफलता पूर्वक सूर्य के लैग्रेंज प्वाइंट (L1 Point) पर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इसकी जानकारी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बताया कि भारत ने एक और उपलब्धि हासिल की। भारत की पहली सौर वेधशाला आदित्य-एल1 अपने गंतव्य तक पहुंच गई है। यह सबसे जटिल और पेचीदा अंतरिक्ष अभियानों को साकार करने में हमारे वैज्ञानिकों के अथक समर्पण का प्रमाण है। मैं इस असाधारण उपलब्धि की सराहना करने में राष्ट्र के साथ शामिल हूं। हम मानवता के लाभ के लिए विज्ञान की नई सीमाओं को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे।

बीते साल 2 सितंबर 2023 को इसरो ने आदित्य एल1 मिशन को लॉन्च किया था। इसके बाद इसरो की इस सैटेलाइट ने करीब पांच महीनों में 15 लाख किलोमीटर का सफर तया किया। इसरो अधिकारियों ने बताया कि आदित्य सैटेलाइट को एल1 प्वाइंट के हैलो ऑर्बिट में सफलतापूर्वक इंसर्ट कर दिया गया है।

क्या करेगा आदित्य एल1

आदित्य एल1 मिशन के सफल होने के बाद इसरो के पहली सौर वेधशाला अब धरती से 15 लाख किलोमीटर की दूसरी पर स्थापित है। इसरो को इस मिशन में करीब 400 करोड़ का खर्च आया है। आदित्य एल1 सैटेलाइट अब हैलो ऑर्बिट में रहकर सूर्य का अध्ययन करेगी। यह सौर तूफानों और सूर्य की ऊपरी तरह की भी स्टडी करेगी। इसरो अधिकारियों का कहना है कि आदित्य सैटेलाइट को एल1 प्वाइंट पर डालना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था, क्योंकि इसमें गति और दिशा का सही तालमेल काफी जरूरी होता है। हमें पता होना चाहिए कि हमारी सैटेलाइट कहां है और कहां जाएगी।

आदित्य ए1 ने ऐसे तय किया सफर

आदित्य एल1 मिशन लॉन्च होने के बाद सैटेलाइट 16 दिनों तक धरती के चारों ओर चक्कर लगाता रहा। इसके बाद इसरो ने पांच बार आदित्य एल 1 की कक्षा में परिवर्तन किया और धीरे-धीरे इसे सूर्य की तरफ धकेला गया। आदित्य एल 1 जैसे ही लैग्रेंज प्वाइंट पर पहुंचा उसे सूर्य के हैलो ऑर्बिट में डाल दिया गया, जिससे यह सूर्य के चक्कर लगाता हुआ उसकी सतह पर नजर रख सके।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article