बीते साल 2 सितंबर 2023 को इसरो ने आदित्य एल1 मिशन को लॉन्च किया था। इसके बाद इसरो की इस सैटेलाइट ने करीब पांच महीनों में 15 लाख किलोमीटर का सफर तया किया। इसरो अधिकारियों ने बताया कि आदित्य सैटेलाइट को एल1 प्वाइंट के हैलो ऑर्बिट में सफलतापूर्वक इंसर्ट कर दिया गया है।
क्या करेगा आदित्य एल1
आदित्य एल1 मिशन के सफल होने के बाद इसरो के पहली सौर वेधशाला अब धरती से 15 लाख किलोमीटर की दूसरी पर स्थापित है। इसरो को इस मिशन में करीब 400 करोड़ का खर्च आया है। आदित्य एल1 सैटेलाइट अब हैलो ऑर्बिट में रहकर सूर्य का अध्ययन करेगी। यह सौर तूफानों और सूर्य की ऊपरी तरह की भी स्टडी करेगी। इसरो अधिकारियों का कहना है कि आदित्य सैटेलाइट को एल1 प्वाइंट पर डालना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था, क्योंकि इसमें गति और दिशा का सही तालमेल काफी जरूरी होता है। हमें पता होना चाहिए कि हमारी सैटेलाइट कहां है और कहां जाएगी।
आदित्य ए1 ने ऐसे तय किया सफर
आदित्य एल1 मिशन लॉन्च होने के बाद सैटेलाइट 16 दिनों तक धरती के चारों ओर चक्कर लगाता रहा। इसके बाद इसरो ने पांच बार आदित्य एल 1 की कक्षा में परिवर्तन किया और धीरे-धीरे इसे सूर्य की तरफ धकेला गया। आदित्य एल 1 जैसे ही लैग्रेंज प्वाइंट पर पहुंचा उसे सूर्य के हैलो ऑर्बिट में डाल दिया गया, जिससे यह सूर्य के चक्कर लगाता हुआ उसकी सतह पर नजर रख सके।
