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सपा विधायक ने 'वंदे मातरम' बोलने से किया इनकार, कहा- इस्लाम मुझे इसकी इजाजत नहीं देता; BJP ने बोला हमला

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 19, 2023, 04:33 PM IST

SP MLA Abu Azmi: सपा विधायक ने कहा, हमें इस्लाम सिखाता है कि सिर उसी के आगे झुकाओ जिसने ये सारा जहान बनाया। मेरे मज़हब के मुताबिक अगर मैं वंदे मातरम नहीं बोल सकता हूं तो इस से मेरे दिल में मेरे मुल्क के लिए इज्जत और मेरी वतनपरस्ती में कोई कमी नहीं होती।

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सपा विधायक अबू आजमी

Photo : ANI

SP MLA Abu Azmi: महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा है कि मैं वंदे मातरम नहीं कर सकता, क्योंकि इस्लाम मुझे इसकी इजाजत नहीं देता। सपा विधायक के बयान के बाद राजनीति गर्म हो गई है। भाजपा नेता शहजाद पूनावाना ने उन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, समाजवादी पार्टी INDIA कहा हिस्सा है और उनके विधायक कहते हैं कि मैं वंदे मातरम नहीं कहूंगा।

दरअसल, यह पूरा विवाद महाराष्ट्र विधानसभा के अंदर हुआ। समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने बुधवार को वंदे मातरम कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, इस्लाम हमें सिखाता है कि सर उसी के आगे झुकाओ, जिसने सारा जहान बनाया।

बयान के बाद दी सफाई

सपा विधायक ने अपने बयान के बाद ट्विटर हैंडल पर सफाई दी है। उन्होंने कहा, हम वो हैं जिनके पूर्वजों ने इस देश के लिए अपनी जान दी, हम वो हैं जिन्होंने पाकिस्तान को नहीं भारत को अपना मुल्क माना। हमें इस्लाम सिखाता है कि सिर उसी के आगे झुकाओ जिसने ये सारा जहान बनाया। मेरे मज़हब के मुताबिक अगर मैं वंदे मातरम नहीं बोल सकता हूं तो इस से मेरे दिल में मेरे मुल्क के लिए इज्जत और मेरी वतनपरस्ती में कोई कमी नहीं होती, और इस से किसी को अप्पत्ति होनी भी नहीं चाहिए। उन्होंने कहा, जितने आप इस मुल्क के उतने हम भी।

भाजपा ने बोला हमला

भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि समाजवादी पार्टी I.N.D.I.A का हिस्सा है और उसके विधायक महाराष्ट्र विधानसभा में कहते हैं कि मैं वंदे मातरम नहीं कहूंगा, यह मेरे धर्म के खिलाफ है। वो जाकर औरंगजेब के सामने सिर झुकाते हैं लेकिन वंदे मातरम कहने से कतराते हैं, जो लोग अपने नाम INDIA रखते हैं, उनका काम हमेशा भारत विरोधी ही क्यों होता है? वहीं इस मामले में एनसीपी विधायक रोहित पवार का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा, मुझे उनके सटीक बयान की जानकारी नहीं है, हालांकि, कोई भी किसी भी धर्म का हो, सभी को देश से प्यार और सम्मान करना चाहिए। मेरा मानना है कि किसी को भी देश के खिलाफ नहीं बोलना चाहिए।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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