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अफगानिस्तान में छिपा है लाल किला धमाके का मास्टरमाइंड डॉ. राथर! इंटरपोल की नजर, रेड कॉर्नर नोटिस की तैयारी

लाल किले के पास हुए भीषण विस्फोट मामले में सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के अहम आरोपी डॉ. मुजफ्फर राथर को पकड़ने के लिए भारत इंटरपोल की मदद लेने की तैयारी कर रहा है। अफगानिस्तान में छिपे होने के संदेह वाले राथर पर फंडिंग, साजो-सामान, संचार और हमले की योजना में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप है। एनआईए की विशेष अदालत उसे पहले ही भगोड़ा अपराधी घोषित कर चुकी है।

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लाल किला आतंकी विस्फोट (फोटो: canva)

दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए विस्फोट मामले में बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस हमले के कथित मास्टरमाइंड और सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के सदस्य डॉ. मुजफ्फर राथर को पकड़ने के लिए जल्द ही इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि राथर की भूमिका एक सह-साजिशकर्ता के तौर पर सामने आने के बाद यह प्रक्रिया तेज की गई है।

एनआईए अदालत से भगोड़ा घोषित है डॉ राथर

बताया गया है कि पेशे से बाल रोग विशेषज्ञ और दक्षिण कश्मीर के निवासी राथर को एनआईए मामलों की विशेष अदालत पहले ही भगोड़ा अपराधी घोषित कर चुकी है। जांच में सामने आया है कि राथर ने लाल किले के बाहर विस्फोट को अंजाम देने वाले डॉ. उमर-उन-नबी को साजो-सामान, वित्तीय सहायता, सुरक्षित संचार और रणनीतिक योजना बनाने में मदद की।

जांच एजेंसियों का दावा है कि राथर ने भारत से फरार होने के बाद विदेश से हमले की साजिश रची, जिसके तार सीधे अफगानिस्तान में मौजूद सुरक्षित ठिकानों से जुड़े हैं। अधिकारियों के अनुसार, राथर फिलहाल अफगानिस्तान में छिपा हुआ है और वहीं से आतंकी नेटवर्क का संचालन कर रहा था।

अगस्त में भारत आया था

जांच में यह भी सामने आया है कि राथर लगातार आतंकियों के संपर्क में था और बम निर्माण तथा ऑपरेशनल रणनीति से जुड़ी जानकारियों के आदान-प्रदान में अहम कड़ी की भूमिका निभा रहा था। वह अफगानिस्तान स्थित संचालकों और भारत में मौजूद आतंकियों के बीच संपर्क और फंडिंग का माध्यम बना। अधिकारियों के मुताबिक, राथर अगस्त के मध्य, दिल्ली विस्फोट से कुछ समय पहले भारत से बाहर गया था। उसने पहले दुबई की यात्रा की और फिर अफगानिस्तान पहुंचा। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि उसने आतंकी मॉड्यूल के लिए धन जुटाने में मदद की और खुद लगभग छह लाख रुपये का योगदान दिया।

विदेशी आकाओं से मिलने तुर्किए भी गया था

जांच एजेंसियों ने बताया कि वर्ष 2021 में राथर, डॉ. मुज़म्मिल अहमद गनई और उमर के साथ तुर्किये गया था। इस यात्रा का उद्देश्य विदेशी आकाओं से संपर्क स्थापित करना और अफगानिस्तान की ओर पारगमन की संभावनाएं तलाशना था। हालांकि उस समय वह अफगानिस्तान में दाखिल नहीं हुआ, लेकिन यह दौरा कट्टरपंथी नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर इकट्ठा किया

इसके बाद, राथर, उमर और फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय में शिक्षक रहे गनई ने खुले बाजार से भारी मात्रा में रसायन जुटाने शुरू किए। जांच में सामने आया कि उन्होंने 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर जमा किया था, जिसे विश्वविद्यालय परिसर के पास छिपाया गया।

12 लोगों की हुई थी मौत

यह साजिश उस समय नाकाम हो गई जब श्रीनगर पुलिस की गहन जांच में गनई को गिरफ्तार कर लिया गया और विस्फोटक सामग्री बरामद कर ली गई। अधिकारियों का मानना है कि इसी कार्रवाई से घबराकर उमर ने लाल किले के बाहर समय से पहले विस्फोट को अंजाम दे दिया, जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हुई।

इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश 19 अक्टूबर को श्रीनगर के नौगाम इलाके में दीवारों पर जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर चस्पा होने की घटना से हुआ। सीसीटीवी फुटेज और जांच के आधार पर तीन स्थानीय आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, जिनसे पूछताछ के बाद नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं। जांच आगे बढ़ते हुए हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय तक पहुंची, जहां से 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री जब्त की गई और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

आईएनएस का इनपुट

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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