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नौसेना में शामिल हुआ ताकतवर 'INS इंफाल': राजनाथ बोले- आजकल समंदर में हलचल कुछ ज्यादा बढ़ गई है

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Dec 26, 2023, 04:32 PM IST

INS Imphal: आईएनएस इंफाल सतह से सतह पर मार करने वाली 8 बराक, 16 ब्रह्मोस एंटीशिप मिसाइल, सर्विलांस रडार, 76 एमएम रैपिड माउंट गन, एंटी सबमरीन टॉरपीडो से लैस है। इस वॉरशिप पर न्यूक्लियर, केमिकल और बॉयोलॉजिकल हमले का इस पर कोई असर नहीं होगा।

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आईएनएस इंफाल

Photo : Twitter

INS Imphal: हिंद महासागर में चीन की शातिर चालों के बीच भारतीय नौसेना ने सबसे आधुनिक और ताकतवर जंगी जहाज को नौसेना में शामिल कर लिया है। जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को विध्वंसक आईएनएस इंफाल को भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया है। आईएनएस इंफाल नौसेना द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए 'विशाखापत्तनम' श्रेणी के चार विध्वंसक युद्धपोतों में से तीसरा युद्धपोत है। इसे नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है और यह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम मझगांव डॉक लिमिटेड, मुंबई द्वारा निर्मित है।

इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार भी मौजूद रहे। राजनाथ सिंह ने कहा, आजकल समंदर में हलचल कुछ ज्यादा बढ़ गई है। भारत की बढ़ती आर्थिक और सामरिक ताकत ने कुछ ताकतों को ईर्ष्या और द्वेष से भर दिया है। भारत सरकार ने हाल ही में अरब सागर में 'एमवी केम प्लूटो' पर ड्रोन हमले और कुछ दिन पहले लाल सागर में 'एमवी साईं बाबा' पर हमले को बेहद गंभीरता से लिया है।

हमलावर को समुद्र दल से भी ढूंढ निकालेंगे

राजनाथ सिंह ने कहा, दोनों घटनाओं के बाद भारतीय नौसेना ने समुद्र की निगरानी बढ़ा दी है। जिसने भी इस हमले को अंजाम दिया है, हम उन्हें समुद्र तल से भी ढूंढ लेंगे और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। रक्षामंत्री ने आगे कहा, आईएनएस इंफाल का भारतीय नौसेना में शामिल होना रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को दिखाता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति MDL एवं नौसेना की प्रतिबद्धता और इसके निर्माण में शामिल सभी हितधारकों की मेहनत, लगन और समर्पण को दिखाता है।

बेहद घातक है INS इंफाल

आईएनएस इंफाल भारतीय नौसेना का सबसे नया स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रायर है। यह ताकत और तकनीक में भी काफी एडवांस है। यह जंगी जहाज विस्तारित दूरी की सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल दागने की क्षमता से लैस है। इस जहाज को एडमॉस्फिरिक कंट्रोल सिस्टम से लैस किया गया है यानी न्यूक्लियर, केमिकल और बॉयोलॉजिकल हमले का इसपर कोई असर नहीं होगा। इस वॉरशिप में सतह से सतह पर मार करने वाली 8 बराक, 16 ब्रह्मोस एंटीशिप मिसाइल, सर्विलांस रडार, 76 एमएम रैपिड माउंट गन, एंटी सबमरीन टॉरपीडो से लैस है। पश्चिमी नौसैन्य कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ वाइस एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने कहा कि आईएनएस इंफाल पहला युद्धपोत है जिसका नाम पूर्वोत्तर के किसी शहर के नाम पर रखा गया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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