IndiGo Gagan Landing: भारतीय नागरिक उड्डयन (Civil Aviation) के इतिहास में 27 जून 2026 की दोपहर एक नए युग की शुरुआत हुई। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की देखरेख में, इंडिगो के एक एयरबस ए320 विमान ने उदयपुर के रनवे पर कदम रखा। खिड़की वाली सीट पर बैठे यात्रियों के लिए यह एक आम लैंडिंग जैसी ही थी, लेकिन वास्तव में इस विमान ने इतिहास रच दिया था। यह विमान जमीन पर लगे पारंपरिक रेडियो सिग्नलों के सहारे नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में तैर रहे भारत के अपने सैटेलाइट्स की गाइडेंस पर नीचे उतरा था।
इससे पहले भारत में केवल छोटे टर्बोप्रॉप (प्रोपेलर वाले छोटे क्षेत्रीय विमान) ही इस तकनीक का परीक्षण कर पाए थे, लेकिन देश के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी बड़े और मुख्य रूट पर चलने वाले कमर्शियल पैसेंजर जेट ने सैटेलाइट आधारित इस स्वदेशी प्रणाली का सफल इस्तेमाल किया है।
समझिए क्या है 'गगन' और यह क्यों है खास?
इसरो (ISRO) और एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित 'गगन' (GAGAN), इसरो के GSAT-8 और GSAT-10 संचार उपग्रहों के जरिए काम करता है। यह अमेरिका के जीपीएस (GPS) की तरह कोई अलग सैटेलाइट नेटवर्क नहीं है, बल्कि यह जीपीएस के ऊपर बैठकर उसकी 'गलतियों को पकड़ने और उन्हें ठीक करने वाला एक स्मार्ट इंस्पेक्टर' है।

गगन का काम कैसे अलग?
आपके मोबाइल का जीपीएस आपको कॉफी शॉप ढूंढने के लिए तो ठीक है (जहां कुछ मीटर की चूक चल जाती है), लेकिन बादलों को चीरते हुए 70 टन के हवाई जहाज को सही रनवे पर उतारने के लिए जीपीएस के सिग्नल पर्याप्त नहीं होते। जीपीएस सिग्नल जब पृथ्वी की ऊपरी वायुमंडलीय परत (आयनोस्फीयर) से गुजरते हैं, तो वे थोड़े मुड़ और धीमे हो जाते हैं। भारत के ऊपर यह समस्या और ज्यादा बदलती रहती है। गगन इसी तकनीकी खामी को दूर करता है।
भारत के लिए गेम-चेंजर क्यों है यह तकनीक?
उदयपुर में हुई इस लैंडिंग को तकनीकी भाषा में LPV (लोकेलाइजर परफॉर्मेंस विद वर्टिकल गाइडेंस) अप्रोच कहा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो यह पायलट को रनवे की तरफ बढ़ते समय बाएं-दाएं और ऊपर-नीचे, दोनों तरफ का सटीक 3D रास्ता दिखाता है। यह बिल्कुल वैसे ही काम करता है जैसे हवाई अड्डों पर लगा करोड़ों रुपये का 'इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम' (ILS) करता है, लेकिन इसके लिए एयरपोर्ट पर किसी भी महंगे उपकरण को लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
यही इस तकनीक की सबसे बड़ी जीत है। भारत के हर छोटे और क्षेत्रीय शहर के हवाई अड्डे पर महंगे ILS उपकरण लगाना आर्थिक रूप से बहुत कठिन है। गगन तकनीक के जरिए अंतरिक्ष में पहले से मौजूद सैटेलाइट्स की मदद से बिना किसी जमीनी खर्चे के छोटे शहरों में भी हवाई जहाजों की सुरक्षित लैंडिंग कराई जा सकती है।
तेजी से बढ़ रहे 'उड़ान' (UDAN) योजना वाले क्षेत्रीय हवाई अड्डों के लिए यह तकनीक वरदान साबित होगी। इससे खराब मौसम या कम दृश्यता (Low Visibility) के दौरान भी उड़ानें रद्द नहीं होंगी, ईंधन की बचत होगी और हवाई यातायात अधिक सुरक्षित और सुगम हो जाएगा। इस सफल लैंडिंग के साथ भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है जिनके पास अपनी ऐसी तकनीक है, और चुनौतीपूर्ण भूमध्यरेखीय (Equatorial) आसमान के ऊपर इसे साबित करने वाला भारत दुनिया का एकमात्र देश है।
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