2036 तक Indian Air Force में 430 नए Fighter Jets, PAF से दोगुनी ताकत जोड़ने का प्लान
- Edited by: Nitin Arora
- Updated Jan 20, 2026, 02:43 PM IST
Indian Air Force expansion plan: भारतीय वायु सेना की वर्तमान fighter strength घटकर लगभग 29 स्क्वाड्रन रह गई है। पुराने विमानों के retirement, regional threats और modernization की जरूरत ने नए व्यापक expansion plan की मांग बढ़ा दी है। ऐसे में राफेल डील के करीब पहुंचने और स्वदेशी प्रोडक्शन के तेज होने के साथ, भारत का कॉम्बैट एयरक्राफ्ट सिस्टम अब एक लंबे और निर्णायक बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुका है।
2036 तक Indian Air Force में 430 नए Fighter Jets (Freepik)
IAF Full Fighter Jet Plan: भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) अगले एक दशक में अपनी लड़ाकू क्षमता को पूरी तरह बदलने जा रही है। फ्रांस के साथ 114 Rafale फाइटर जेट्स की बड़ी डील अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और इसके साथ ही IAF ने अब तक का सबसे बड़ा कॉम्बैट एयरक्राफ्ट इंडक्शन प्लान तैयार किया है।
IAF के एक वरिष्ठ अधिकारी ने idrw.org को बताया है कि वायु सेना अगले 10 वर्षों में कम से कम 430 नए combat aircraft शामिल करने की योजना पर काम कर रही है। इस योजना का बड़ा हिस्सा 2036 तक पूरा होने की उम्मीद है। अगर यह रोडमैप पूरी तरह सही रहता है तो भारत उतनी ही नई फाइटर ताकत जोड़ लेगा जितनी आज पूरी Pakistan Air Force के पास मौजूद है यानी अभी पहले जितने हैं, उसे हटाकर नए जेट्स इतने हो जाएंगे जितने पाकिस्तान वायु सेना के पास वर्तमान में पूरे बेड़े में हैं। इससे क्षेत्र में हवाई शक्ति का संतुलन पूरी तरह से बदल जाएगा।
क्यों जरूरी हो गया IAF का इतना बड़ा Expansion Plan
पिछले कुछ वर्षों में MiG-21 और MiG-27 जैसे पुराने लड़ाकू विमानों की रिटायरमेंट के कारण IAF की स्क्वाड्रन संख्या लगातार घटती गई है। वहीं दूसरी ओर, चीन अपनी एयर फोर्स को तेजी से आधुनिक बना रहा है और पाकिस्तान भी अपने फाइटर फ्लीट को अपग्रेड कर रहा है।
IAF की अधिकृत स्क्वाड्रन संख्या 42 है, लेकिन मौजूदा समय में यह इससे काफी नीचे है। ऐसे में दो-फ्रंट वॉर की संभावना, आधुनिक युद्ध में टेक्नोलॉजी की भूमिका और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा विस्तार बेहद अहम माना जा रहा है।
114 Rafale बनेंगे IAF की रीढ़
इस पूरे प्लान की सबसे बड़ी कड़ी 114 राफेल फाइटर जेट्स हैं। ये विमान भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के तहत खरीदे जाएंगे, जिनका बड़ा हिस्सा भारत में ही मैन्युफैक्चर किया जाएगा।
राफेल को आने वाले वर्षों में IAF का प्राइमरी मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट माना जा रहा है। 2030 के दशक और उसके बाद भी Rafale, भारतीय वायु सेना की strike, air superiority और deep penetration क्षमता की रीढ़ बना रहेगा। मौजूदा Rafale स्क्वाड्रनों के साथ मिलकर यह फ्लीट एक मजबूत रीढ़ तैयार करेगी।
Tejas Mk1A और Mk2 से स्वदेशी ताकत को रफ्तार
राफेल के साथ-साथ IAF का पूरा जोर स्वदेशी Light Combat Aircraft कार्यक्रम पर भी रहेगा।
-पहले ऑर्डर के तहत 73 Tejas Mk1A
-दूसरे कॉन्ट्रैक्ट में 97 Tejas Mk1A
-कुल 170 Tejas Mk1A फाइटर जेट्स
-इनके साथ 18 Tejas ट्रेनर एयरक्राफ्ट
यह स्टैंडर्डाइज्ड लाइट फाइटर फ्लीट एयर डिफेंस, स्ट्राइक और क्लोज एयर सपोर्ट जैसी भूमिकाओं के लिए तैनात की जाएगी।
इसके अलावा, Tejas Mk2 को भी मीडियम वेट फाइटर सेगमेंट में शामिल किया जाएगा। योजना के मुताबिक 2033–34 तक कम से कम 40 Tejas Mk2 विमान वायु सेना में शामिल हो सकते हैं, जो Rafale और Gripen जैसी कैटेगरी में गिने जाएंगे।
Su-30MKI और Su-57 से बढ़ेगी ताकत
हेवी फाइटर सेगमेंट में Su-30MKI IAF की ताकत का आधार बना रहेगा। वहीं, नुकसान की भरपाई करने और स्क्वाड्रन की ताकत बनाए रखने के लिए कम से कम 12 अतिरिक्त विमानों की योजना है।
इसके साथ ही, भारत अब Fifth Generation Fighter Aircraft (FGFA) कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। रिपोर्ट के अनुसार, रूस के 60 Su-57E फाइटर जेट्स सरकार-से-सरकार समझौते के तहत शामिल किए जा सकते हैं। ये विमान 2030 के दशक में IAF को स्टील्थ स्ट्राइक और air dominance capability देंगे।
2036 में AMCA से भारत की 5th Generation एंट्री
IAF के भविष्य की सबसे अहम कड़ी होगी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA)। यह पूरी तरह स्वदेशी stealth fighter होगा।
योजना के अनुसार:
-40 AMCA Mk1
-2036 में इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होने की उम्मीद
इसके साथ ही भारत आधिकारिक तौर पर 5th Generation Fighter Jet club में स्वदेशी प्लेटफॉर्म के साथ एंट्री करेगा।
Pakistan Air Force से तुलना क्यों अहम है?
आज Pakistan Air Force के पास कुल मिलाकर लगभग 400 के आसपास फ्रंटलाइन कॉम्बैट एयरक्राफ्ट माने जाते हैं। IAF अकेले 430 नए fighter jets जोड़ने की योजना बना रही है।
इसका मतलब साफ है। यह सिर्फ संख्या बढ़ाने का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्रीय एयर पावर बैलेंस को पूरी तरह बदलने की रणनीति है।
IAF का Vision 2036: संख्या से ज्यादा क्षमता पर फोकस
यह प्लान सिर्फ MiG-21 और MiG-27 की कमी पूरी करने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य भारत को qualitative और quantitative दोनों स्तरों पर बढ़त दिलाना है।
Rafale, Tejas, Su-57 और AMCA का यह मिश्रण 2036 तक इंडियन एयरफोर्स को दुनिया की सबसे आधुनिक वायु सेनाओं में शामिल कर सकता है। राफेल डील के करीब पहुंचने और स्वदेशी प्रोडक्शन के तेज होने के साथ, भारत का कॉम्बैट एयरक्राफ्ट सिस्टम अब एक लंबे और निर्णायक बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुका है। यह खबर सिर्फ भविष्य की योजना नहीं, बल्कि आने वाले 30 साल के लिए भारत की हवाई ताकत की दिशा तय करने वाला रोडमैप है।
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