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114 राफेल के साथ इन 31 जेट्स को खरीदने पर ध्यान, इंडियन एयरफोर्स संभालेगी आसमान तो समुद्र पर दुश्मनों को मचा चखाएगी नेवी

IAF-Indian Navy Rafale Jets: भारत ने तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने के प्लान की भी आउटलाइन बनाई है। अगर वह प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है, तो कई कैरियर बैटल ग्रुप्स में एयर विंग की ताकत बनाए रखने के लिए एक बड़ा राफेल M फ्लीट जरूरी होगा।

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इंडियन एयरफोर्स संभालेगी आसमान तो समुद्र पर दुश्मनों को मचा चखाएगी नेवी

India Rafale Jets News: फ्रांस के साथ भारत के गहरे होते डिफेंस रिश्ते एक और अहम पड़ाव की ओर बढ़ सकते हैं। फ्रेंच फाइनेंशियल डेली ला ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली न सिर्फ इंडियन एयर फोर्स (Indian Air Force) के लिए 114-एयरक्राफ्ट राफेल डील पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है, जिसका बेसब्री से इंतजार है, बल्कि इंडियन नेवी के लिए भी भारत सरकार कुछ बड़ा करने जा रही है। बताया गया कि इंडियन नेवी के लिए 31 और डसॉल्ट राफेल M जेट के नए ऑर्डर पर भी विचार किया जा रहा है। ऐसे में 114 राफेल इंडियन एयरफोर्स के लिए और नेवी के लिए भी समुद्र पर दुश्मनों को मचा चखाने के लिए 31 राफेल एम जेट्स खरीदे जा सकते हैं।

पहले भारत दे चुका है 26 राफेल का ऑर्डर

यहां पहले आप ये समझें कि अगर यह फाइनल हो जाता है, तो यह उन 26 राफेल M एयरक्राफ्ट के अलावा होगा जिनका ऑर्डर भारत ने अप्रैल 2025 में दिया था। ऐसे में नेवी के लिए कुछ राफेल फ्लीट में 57 नए एयरक्राफ्ट हो जाएंगे। इस तरह के कदम से इस इलाके में और यहां तक कि यूरोप में भी नेवी एविएशन पावर का बैलेंस काफी बदल जाएगा।

फ्रांस से भी ज्यादा जेट इंडियन नेवी के पास होंगे

फ्रेंच नेवी अभी 41 राफेल मरीन एयरक्राफ्ट चलाती है। अगर भारत और 31 जेट के साथ आगे बढ़ता है, तो इंडियन नेवी के पास 57 राफेल M फाइटर होंगे, जो फ्रांस के अपने फ्लीट की ताकत से भी ज्यादा होंगे।

इंडियन नेवी ने लंबे समय से अपने एयरक्राफ्ट कैरियर को ठीक से तैयार करने के लिए 57 कैरियर-बोर्न फाइटर जेट की जरूरत पहचानी है। फ्रेंच मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि 31 और जेट्स की जरूरत कई सालों से मानी जा रही है और मौजूदा जियोपॉलिटिकल और ऑपरेशनल माहौल इस फैसले को तेज कर सकता है।

अगर यह बड़ा ऑर्डर पूरा होता है, तो भारत दुनिया भर में राफेल M वेरिएंट का सबसे बड़ा ऑपरेटर बन जाएगा।

राफेल M कहां से संचातिल होगा?

भारत के भविष्य के राफेल मरीन एयरक्राफ्ट के मुख्य रूप से देश के पहले स्वदेश में बने एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत से ऑपरेट होने की उम्मीद है। भारत की शिपबिल्डिंग मैच्योरिटी के सिंबल के तौर पर कमीशन किया गया, विक्रांत ज्यादा समुद्री आत्मनिर्भरता की ओर एक स्ट्रेटेजिक मोड़ दिखाता है।

राफेल M फ्लीट INS विक्रमादित्य से भी ऑपरेट हो सकता है, जो मॉडर्नाइज्ड कैरियर है जिसे मूल रूप से रूस से खरीदा गया था। ये दोनों कैरियर मिलकर भारत की मौजूदा ब्लू-वॉटर नेवल कैपेबिलिटी की रीढ़ हैं।

आगे देखते हुए, भारत ने तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने के प्लान की भी आउटलाइन बनाई है। अगर वह प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है, तो कई कैरियर बैटल ग्रुप्स में एयर विंग की ताकत बनाए रखने के लिए एक बड़ा राफेल M फ्लीट जरूरी होगा।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ा author

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदे... और देखें

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