India US Trade Deal Update: भारत अमेरिका के बीच ट्रेड डील (India US Trade Deal) पर अपडेट सामने आया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने X पर लिखा, 'इंडियन ट्रेड डेलीगेशन इस हफ़्ते वाशिंगटन पहुंचेगा। हमारी बाइलेटरल ट्रेड डील को फ़ाइनल करने के लिए यह एक बहुत अच्छा कदम है। दोनों देशों के लिए फ़ायदेमंद!' खास बात यह है कि यह डेवलपमेंट ऐसे समय में हुआ है जब ग्लोबल टैरिफ की शर्तों में बड़े बदलाव हो रहे हैं।
अमेरिका जाने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करेंगे, जो वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में सीमा शुल्क विभाग और विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल होंगे।
'अमेरिका के व्यापारिक माहौल में बदलाव आया है'
ये बातचीत ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका के व्यापारिक माहौल में बदलाव आया है। इस साल की शुरुआत में, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए भारी-भरकम शुल्कों को रद्द कर दिया था। इसके तुरंत बाद, प्रशासन ने 24 फरवरी से शुरू होकर 150 दिनों के लिए, सभी देशों से होने वाले आयात पर एक समान 10 प्रतिशत का शुल्क लागू कर दिया।
इन बदलावों को देखते हुए, उम्मीद है कि दोनों पक्ष फरवरी में तय हुए समझौते के फ्रेमवर्क पर फिर से विचार करेंगे। पहले से तय एक बैठक टाल दी गई थी, और अब वह इस हफ्ते हो रही है।
टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत
पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन चर्चाओं में US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव द्वारा अपने व्यापार कानून की धारा 301 के तहत शुरू की गई दो जांचों पर भी बात हो सकती है। भारत ने इन मामलों में लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है और US से इन जांचों को वापस लेने को कहा है, यह कहते हुए कि इनके पीछे कोई ठोस आधार नहीं है। पिछले मसौदे के तहत, अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हो गया था। उसने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से जुड़े अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को भी खत्म कर दिया था, और बाकी शुल्कों को और कम करने की योजना बनाई थी।
भारत ने अगले 5 वर्षों में अमेरिका से आयात बढ़ाने की भी योजना जाहिर की
इसके जवाब में, भारत ने अमेरिका के कई तरह के औद्योगिक और कृषि उत्पादों-जिनमें मेवे, फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट शामिल हैं पर लगने वाले टैरिफ को कम करने या हटाने का प्रस्ताव दिया था। भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से आयात बढ़ाने की भी योजना जाहिर की थी-जैसे कि ऊर्जा, विमान, तकनीकी उत्पाद और कच्चा माल।
