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India-US GE F414 Engine Deal: अमेरिकी इंजन की कीमत दोगुनी से ज्यादा, भारत के सामने अब क्या हैं नए विकल्प?

India-US GE F414 Engine Deal: भारत के महत्वाकांक्षी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट को GE F414 इंजन डील के कारण नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की GE एयरोस्पेस के F414 इंजन की लागत शुरुआती अनुमान से कई गुना बढ़ गई है, जिससे DRDO और एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी की योजना प्रभावित हो सकती है।

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जी ई एफ414 फाइटर जेट इंजन की लागत शुरुआती अनुमान की तुलना में काफी बढ़ गई है।

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

India-US GE F414 Engine Deal: भारत के 5th जेनरेशन के लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट मुश्किलों में फंसता नजर आ रहा है। अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस (GE Aerospace) के F414 इंजन की कीमत में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। जी ई एफ414 फाइटर जेट इंजन की डील की लागत शुरुआती अनुमान की तुलना में काफी बढ़ गई है, जिसकी वजह से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अब दूसरे इंजन ऑप्‍शन की तलाश कर रहा है।

अमेरिका की जीई (GE) एयरोस्पेस कंपनी का F414 इंजन, जो AMCA Mk-1 और तेजस Mk-2 दोनों के लिए चुना गया था, अब महंगा हो गया है। पहले एक इंजन की कीमत करीब 70-80 करोड़ रुपये थी, जो अब 200 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी का असर डीआरडीओ और एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी पर पड़ने वाला है। कीमत, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, प्रोडक्शन और निवेश जैसे मुद्दों पर बात नहीं बन सकी है। GE ने भारत में F414 इंजन की असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिसके लिए 800 मिलियन डॉलर (लगभग 6000 करोड़ रुपये) से ज्यादा निवेश की मांग की गई है।

AMCA के लिए F414 इंजन इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) भारत का स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट प्रोजेक्ट है। यह एक ट्विन-इंजन लड़ाकू विमान होगा, जिसे दुश्मन के इलाके में गहराई तक सटीक हमला करने और हवाई बढ़त कायम रखने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। इसमें कम रडार सिग्नेचर, लंबी दूरी तक हाई-स्पीड उड़ान और इंटरनल वेपन बे जैसी अत्याधुनिक क्षमताएं शामिल होंगी।

AMCA के शुरुआती संस्करण Mk1 के लिए GE का F414-INS6 इंजन चुना गया है। यही इंजन विमान की शुरुआती ऑपरेशनल क्षमता की नींव बनेगा और शुरुआती 2 से 4 स्क्वाड्रन को पावर देगा। अनुमान है कि इन स्क्वाड्रन में करीब 60 से 70 फाइटर जेट शामिल हो सकते हैं, इसलिए इस इंजन डील को AMCA कार्यक्रम के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

क्या है कीमत बढ़ने की वजह?

एक्सपर्ट्स और रक्षा सूत्रों के मुताबिक, जेई एयरोस्पेस (GE Aerospace) द्वारा दाम बढ़ाए जाने के पीछे निम्नलिखित वैश्विक और रणनीतिक कारण हैं। पिछले 2-3 वर्षों में वैश्विक स्तर पर एयरोस्पेस-ग्रेड कच्चे माल और विशिष्ट घटकों की भारी कमी हुई है। जीई ने अमेरिकी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए करीब 1 अरब डॉलर का निवेश किया है, जिसका वित्तीय बोझ अब वह भारत जैसे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों पर डाल रही है।

चूंकि भारत का पूरा AMCA Mk-1 और तेजस Mk-2 कार्यक्रम इसी F414 इंजन (98 kN थ्रस्ट क्लास) के इर्द-गिर्द डिजाइन किया गया है और डिजाइन पूरी तरह 'फ्रीज' हो चुका है, अमेरिकी कंपनी को पता है कि भारत के लिए इस मोड़ पर इंजन बदलना बेहद मुश्किल और समय लेने वाला होगा।

लागत बढ़ने से क्या बदला?

रिपोर्ट्स के अनुसार, इंजन की कीमत और प्रोडक्शन कॉस्ट में बढ़ोतरी को लेकर बातचीत कठिन हो गई है। इसी वजह से रक्षा क्षेत्र में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या भारत को मौजूदा मॉडल पर आगे बढ़ना चाहिए या समानांतर विकल्पों को भी सक्रिय करना चाहिए।

भारत के सामने क्या हैं विकल्प?

फ्रांस की सैफ्रान और ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस कंपनियां पहले भी भारत के साथ इंजन विकास में साझेदारी के लिए इच्छुक रही हैं। उम्मीद है कि दोनों कंपनियां टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और औद्योगिक सहयोग का बेहतर प्रस्ताव दे सकती हैं। हालांकि इंजन बदलना आसान नहीं है क्योंकि यह उड़ान नियंत्रण, सर्टिफिकेशन, परीक्षण और परफॉर्मेंस को प्रभावित करता है। एयरफ्रेम डिजाइन लगभग फाइनल हो चुका है, इसलिए नया इंजन अनुकूलित करना पड़ेगा।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को मजबूत वार्ता करनी चाहिए। अगर GE से समझौता नहीं होता तो विकल्पों को तेजी से आगे बढ़ाना होगा। AMCA की सफलता न सिर्फ वायुसेना की ताकत बढ़ाएगी बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा निर्यातक बनाने में भी मदद करेगी।

Mayank Singh
Mayank Singhauthor

Mayank Singh is a News Editor (Defence) known for his sharp reporting on military affairs. With a strong command over defence institutions and operational issues, his work offers readers clear, credible, and well-researched insights into India’s security landscape.

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