Iran US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बाद तनाव गहराता जा रहा है। इन दिनों दुनियाभर के तमाम देशों की निगाहें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी हुई हैं, जहां से सीमित संख्या में जहाज गुजर पा रहे हैं और इसका वैश्विक प्रभाव दिखाई दे रहा है। इस बीच, टाइम्स नाउ डॉट कॉम ने केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनेवाल के साथ खास बातचीत की जिसमें उन्होंने विश्वास दिलाया कि भारत हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने होर्मुज में आई बाधाओं, भारत की तैयारियों और वैश्विक व्यापार पर असर को लेकर विस्तार से जानकारी दी।
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होर्मुज में स्थिति को कैसे संभाला गया?
इस सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''मंत्रालय ने तेजी से कदम उठाते हुए सभी बड़े बंदरगाहों और संबंधित पक्षों के साथ लगातार समन्वय स्थापित किया। जहाजों की आवाजाही, कार्गो की स्थिति और बंदरगाह संचालन पर नजर रखने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया।''
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्पष्ट निर्देश थे कि हम हरसंभव कदम उठाकर असर को कम करें और सप्लाई चेन को बनाए रखें। इसके लिए बंदरगाहों को नई रणनीतियां अपनाने, क्षमता बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए। इन प्रयासों से होर्मुज संकट का असर सीमित रहा और व्यापार पर कम प्रभाव पड़ा।
क्या अब भारत आने वाला सारा ट्रैफिक सामान्य हो गया है?
सर्बानंद सोनेवाल ने कहा कि देश के प्रमुख बंदरगाहों पर लगभग 90 फीसदी लंबित कार्गो क्लियर कर दिया गया है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, स्थिति काफी हद तक सामान्य हो गई है और जहाजों की आवाजाही स्थिर है, लेकिन हम लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारा दृष्टिकोण सतर्क और सक्रिय है, ताकि किसी भी शेष या नई समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके और भारत आने वाला ट्रैफिक सुचारू बना रहे।
लॉजिस्टिक्स भागीदारों सहित सभी हितधारकों को राहत कैसे मिलेगी?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता निर्यातकों, आयातकों और लॉजिस्टिक्स पार्टनर्स पर बोझ कम करना है। इसके लिए बंदरगाहों को ग्राउंड रेंट पर छूट और रीफर शुल्कों (Reefer Charges) में रियायत जैसे वित्तीय राहत उपाय लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही शिकायत निवारण प्रणाली को भी मजबूत किया गया है, ताकि किसी भी समस्या का जल्द से जल्द समाधान हो सके।
मुनाफाखोरी के खिलाफ क्या मंत्रालय को कोई रिपोर्ट मिली है?
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट और सख्त है। नौवहन महानिदेशालय (Directorate General of Shipping) को सभी शिपिंग शुल्कों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर कहीं भी अनुचित लाभ कमाने की कोशिश पाई जाती है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्या समुद्री मार्गों पर खत्म हो चुका है संकट?
सर्बानंद सोनेवाल ने कहा कि स्थिति में काफी सुधार हुआ है और सामान्य संचालन बहाल हो गया है। हालांकि, बदलते हुए वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए सरकार किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि उनका जोर समुद्री क्षेत्र को मजबूत बनाए रखने और भारत के व्यापारिक हितों की हर हाल में रक्षा करने पर है।
