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होर्मुज संकट के बीच भारत को बड़ी राहत, ईरान से 7 साल बाद इंडिया आ रहा 'क्रूड ऑयल टैंकर!'; रिपोर्टों के हवाले से खबर

ईरान से तेल लेकर एक क्रूड ऑयल टैंकर भारत की ओर बढ़ रहा है; मई 2019 के बाद यह पहली बार हो रहा है। इस युद्ध के कारण भारत को रूस और ईरान, दोनों से तेल और गैस खरीदने का मौका मिला है। ऐसा मीडिया रिपोर्टों के आधार पर बताया जा रहा है।

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ईरान से तेल लेकर एक क्रूड ऑयल टैंकर भारत की ओर बढ़ रहा है, मई 2019 के बाद यह पहली बार हो रहा है। इस युद्ध के कारण भारत को रूस और ईरान, दोनों से तेल और गैस खरीदने का मौका मिला है, एक विदेशी झंडे वाला टैंकर, जिसमें लगभग 6 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल लदा है, 4 अप्रैल तक गुजरात के दीनदयाल बंदरगाह स्थित वाडिनार में लंगर डालने की उम्मीद है। ऐसा मीडिया रिपोर्टों के आधार पर बताया जा रहा है। मई 2019 के बाद से यह ईरान से भारत की पहली सीधी खेप होगी; उस समय नई दिल्ली ने कड़े प्रतिबंधों का पालन करते हुए आयात रोक दिया था।

एस्वातिनी के झंडे वाला कच्चा तेल टैंकर 'पिंग शुन' भारत की ओर बढ़ रहा है। भारत के ऊर्जा स्रोतों में यह एक अहम बदलाव है, खासकर तब जब नई दिल्ली एक बार फिर से रियायती रूसी कच्चे तेल की ओर मुड़ गई है जिस पर कभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ लगाए थे।

भारतीय निर्यात पर दंडात्मक टैरिफ लगाने की धमकी भी दी थी

ट्रंप ने आरोप लगाया था कि भारत द्वारा रूसी तेल की भारी खरीद सीधे तौर पर यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि नई दिल्ली मॉस्को के अभियान को आर्थिक मदद दे रही है, और चेतावनी दी कि ऐसा व्यापार अस्वीकार्य है; साथ ही, पिछले साल उन्होंने भारतीय निर्यात पर दंडात्मक टैरिफ लगाने की धमकी भी दी थी।ईरान के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाली सैन्य कार्रवाइयों के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होने वाला जहाज़ी आवागमन बाधित हो गया है।

'कोई खास जानकारी नहीं... ईरानी तेल ले जा रहे जहाज़ के भारत की ओर आने की खबरों के बीच शिपिंग अधिकारी का बयान

ईरानी कच्चा तेल ले जा रहे एक जहाज़ के भारत की ओर आने की खबरों के कुछ घंटों बाद, बंदरगाह, जहाज़रानी और जलमार्ग मंत्रालय ने कहा कि उसे ऐसी किसी भी घटना की जानकारी नहीं है। शिपिंग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल से जब भारत की ओर बढ़ रहे एक ईरानी तेल जहाज़ के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया कि सरकार के पास उस जहाज़ के बारे में 'कोई खास जानकारी नहीं' है। मंगल ने पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान यह टिप्पणी की।

ईरान पर प्रतिबंध, रूसी तेल पर टैरिफ और भारत का विविधीकरण

अमेरिका ने सबसे पहले 2015 के 'ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ़ एक्शन' (JCPOA) से हटने के बाद ईरान पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगा दिए। यह एक परमाणु समझौता था जिसका मकसद प्रतिबंधों में राहत के बदले तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाना था।

वॉशिंगटन ने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं, बैलिस्टिक मिसाइल विकास और क्षेत्रीय प्रॉक्सी को समर्थन देने को लेकर चिंताएं जताईं। 'अधिकतम दबाव' अभियान ने ईरान के ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाया, जिससे तीसरे देशों के लिए बिना किसी अतिरिक्त प्रतिबंध का सामना किए ईरान से तेल खरीदना जोखिम भरा हो गया।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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