भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच रक्षा समझौते पर मुहर लग गई है। यूरोपियन कमीशन की वाइस-प्रेसिडेंट काजा कल्लास ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के दौरान इसकी खुद घोषणा की है। मीटिंग का नेतृत्व भारत की ओर से खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कर रहे थे। यह बैठक भारत-यूरोपीय संघ शिखर वार्ता से पहले हुई।
काजा कल्लास ने क्या कहा?
यूरोपियन कमीशन की वाइस-प्रेसिडेंट काजा कल्लास ने कहा, "हमारा स्वागत करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद और कल गणतंत्र दिवस का अनुभव बहुत अच्छा रहा। उसके लिए भी धन्यवाद... यह देखकर गर्व हुआ कि हमारे ऑपरेशंस भी इस परेड का हिस्सा थे। यह दिखाता है कि हम कैसे एक साथ काम कर पाए हैं। सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर साइन करना एक मील का पत्थर है, और हम इस पर आगे बढ़ सकते हैं। रक्षा सहयोग को और विकसित करने के लिए हम मल्टीलेटरल फोरम के साथ-साथ द्विपक्षीय रूप से भी बहुत कुछ एक साथ काम कर सकते हैं। मैं आज हमारी चर्चाओं और भविष्य में और सहयोग के लिए सच में उत्सुक हूं।"
राजनाथ सिंह ने क्या कहा
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों को गहरा करने के व्यापक लक्ष्य के तहत अपनी रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं को एकीकृत करने के तरीकों पर मंगलवार को चर्चा की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूरोपीय संघ की विदेश एवं सुरक्षा मामलों की प्रमुख काजा कलास के बीच हुई बैठक में इस मामले पर प्रमुखता से चर्चा की गई। सिंह ने चर्चा के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘विश्वसनीय रक्षा परिवेश और भविष्य के लिए तैयार क्षमताओं के निर्माण के उद्देश्य से आपूर्ति श्रृंखलाओं को एकीकृत करने के अवसरों सहित द्विपक्षीय रक्षा मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला पर चर्चा की गई। भारत और यूरोपीय संघ के देशों के बीच और अधिक सहयोग को लेकर उत्साहित हूं।’’
भारत का बड़ा साझेदार
यूरोपीय संघ पहले से ही भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत के कुल निर्यात में ईयू की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत है, जबकि ईयू के कुल विदेशी निर्यात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 9 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ईयू के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार 136.53 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर और आयात 60.68 अरब डॉलर रहा। इस तरह ईयू भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया। इसके अलावा, सेवाओं का व्यापार भी दोनों के बीच 2024 में 83.10 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
