India Rejects US Religious Freedom Panel Report: अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता आयोग को भारत ने खरी-खरी सुनाई है। भारत ने देश में अल्पसंख्यकों पर इसकी रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज करते हुए खुद इसे 'चिंता का विषय' बताया है। भारत ने जोर देकर कहा कि अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) को "चिंता का विषय" घोषित किया जाना चाहिए। भारत ने इसकी रिपोर्ट को भी पूरी तरह खारिज कर दिया है। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि देश में अल्पसंख्यकों के साथ खराब व्यवहार हो रहा है।
विदेश मंत्रालय ने बताया पक्षपाती रिपोर्ट
विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़े शब्दों में कहा कि लोकतंत्र और सहिष्णुता के प्रतीक के रूप में भारत की छवि को कमजोर करने के प्रयास सफल नहीं होंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि USCIRF की नवीनतम रिपोर्ट पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित आकलन जारी करने के अपने पैटर्न को जारी रखती है।
USCIRF ही चिंता का विषय
विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है, USCIRF द्वारा अलग-अलग घटनाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत करने और भारत के जीवंत बहुसांस्कृतिक समाज पर संदेह जताने के लगातार प्रयास धार्मिक स्वतंत्रता के लिए वास्तविक चिंता के बजाय एक जानबूझकर किए गए एजेंडे को दर्शाते हैं। वास्तव में, USCIRF को ही चिंता का विषय घोषित किया जाना चाहिए।
भारत ने पिछले कई वर्षों से ऐसी रिपोर्टों को हमेशा पक्षपाती और एजेंडा-चालित बताकर खारिज किया है। 2025 की रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि 2024 में भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले और भेदभाव में वृद्धि जारी रही। इसने भाजपा पर लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान मुसलमानों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणास्पद बयानबाजी करने का भी आरोप लगाया।
रिपोर्ट में RAW पर भी उठाई उंगली
इसके अलावा, रिपोर्ट में सिख अलगाववादियों के खिलाफ हत्या की साजिश में कथित संलिप्तता के लिए जासूसी एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की सिफारिश भी की गई है। संभवतः इसमें गुरपतवंत सिंह पन्नू मामले का संदर्भ दिया गया है। अमेरिकी आयोग ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए भारत को विशेष चिंता का देश घोषित करने की सिफारिश की है।
