VIDEO: 'अगर हिंदू एकजुट हो जाएं तो...', बंगाल की बाबरी मस्जिद पर भी खुलकर बोले मोहन भागवत
- Edited by: अनुराग गुप्ता
- Updated Dec 21, 2025, 06:15 PM IST
Bangladesh Violence: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक हैं और वहां की स्थिति काफी कठिन है। उन्होंने कहा कि कहा कि अगर हिंदू समाज एकजुट हो जाए, तो बंगाल में हालात बदलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत
Bangladesh Violence: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक हैं और वहां की स्थिति काफी कठिन है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में वहां के हिंदुओं को अपनी अधिकतम सुरक्षा के लिए एकजुट रहना होगा। साथ ही दुनियाभर के हिंदुओं को उनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए।
मोहन भागवत ने क्या कुछ कहा?
मोहन भागवत ने कहा, ''हमें अपनी सीमाओं के भीतर रहते हुए जितनी मदद हो सके, करनी चाहिए। हमें वह सब कुछ करना है जो हम कर सकते हैं, और हम कर रहे हैं। हिंदुओं के लिए एकमात्र देश भारत है। भारत सरकार को इस पर ध्यान देना होगा। उन्हें कुछ करना होगा।''
उन्होंने कहा कि संभव है कि वे (भारत सरकार) पहले से ही कुछ कदम उठा रहे हों। कुछ बातें बताई जाती हैं, कुछ नहीं बताई जा सकतीं। कभी नतीजे मिलते हैं, कभी नहीं मिलते, लेकिन कुछ तो करना ही होगा।
पश्चिम बंगाल की स्थिति पर मोहन भागवत ने कहा कि अगर हिंदू समाज एकजुट हो जाए, तो बंगाल में हालात बदलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। हालांकि, राजनीतिक बदलाव को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका कार्यक्षेत्र नहीं है। उन्होंने कहा, ''राजनीतिक बदलाव के बारे में सोचना मेरा काम नहीं है। संघ समाज में बदलाव के लिए काम करता है...''
'बाबरी मस्जिद विवाद फिर शुरू करने की साजिश'
मोहन भागवत ने निलंबित तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक हुमायूं कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखे जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद को दोबारा बनाकर विवाद को फिर से शुरू करने की एक राजनीतिक साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम महज वोटों के लिए किया जा रहा है और इससे न तो मुसलमानों का भला होगा और न ही हिंदुओं का...ऐसा नहीं होना चाहिए। मुझे ऐसा लगता है।
जब संघ प्रमुख से सवाल किया गया कि क्या सरकारी पैसे से धार्मिक स्थल बनाना सही है तो उन्होंने कहा, ''सरकार को मंदिर या कोई भी धार्मिक स्थल नहीं बनाना चाहिए। यही नियम है। सोमनाथ मंदिर बनाया गया था। उस समय सरकार वल्लभभाई पटेल गृह मंत्री थे। राष्ट्रपति उसके उद्धाटन में शामिल हुए थे, लेकिन सरकारी पैसा इस्तेमाल नहीं किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर बनाया गया। सरकार से एक ट्रस्ट बनाने के लिए कहा गया था, और उन्होंने बनाया। सरकार ने पैसा नहीं दिया। हम सबने योगदान दिया..."
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