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चीन से आंख में आंख मिलाकर बात करेगा भारत, बॉर्डर पर बुना जा रहा सड़कों का जाल

  • Authored by: शिवानी शर्माEdited by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 27, 2023, 03:03 PM IST

गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद भारत अरुणाचल प्रदेश में स्ट्रैटजिक सड़कें बनाने पर जोर दे रहा है। 37 नई सड़कों को 1300 करोड़ रुपये के बजट से बनाया जाएगा।

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चीन सीमा पर सड़कों का जाल बुल रहा भारत

Photo : टाइम्स नाउ ब्यूरो

India-China Border Roads: भारत-चीन सीमा पर 875 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली 37 नई सड़कें बनाई जाएंगी। इन नई सड़कों को बनाने के लिए लगभग 13,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। नई सड़कों का ये काम भारत-चीन सीमा सड़क (आईसीबीआर) कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, ICBR-III के तहत इनमें से लगभग 70% सड़कें अरुणाचल प्रदेश में बनाई जाएंगी।

वर्तमान में, ICBR का चरण- I और II चल रहा है और इनमें लगभग 1,600 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में 1,435 किलोमीटर सड़कों का निर्माण शामिल है। आईसीबीआर परियोजना पुलों और सुरंगों सहित रणनीतिक सड़कों का निर्माण करके भारत-चीन सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास की परिकल्पना करती है, और यह मुख्य रूप से सीमा के दूसरी तरफ चीनियों द्वारा बुनियादी ढांचे के विकास के जवाब में है।

22 सड़कों को दी जाएगी प्राथमिकता

सूत्रों के मुताबिक ICBR-III का प्रस्ताव हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक में लाया गया था, जहां कार्यक्रम के मौजूदा दो चरणों के तहत परियोजनाओं की प्रगति में देरी के मुद्दों पर चर्चा की गई थी। ICBR-III के तहत 22 सड़कों को विकसित करने को पहली प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है।

दिसंबर तक पूरी होंगी 25 सड़कें

ICBR के पहले चरण के तहत 25 सड़कें अब इस दिसंबर तक पूरी होने वाली हैं। इस प्रमुख सड़क विकास कार्यक्रम के दूसरे चरण के मामले में, कुल 32 हिस्सों में से केवल 25 परियोजनाओं में ही काम शुरू हो पाया है। बाकी परियोजनाओं में वन मंजूरी लंबित होने और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में संशोधन के कारण अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है। केंद्र सरकार की चार एजेंसियों- बीआरओ, सीपीडब्ल्यूडी, आईटीबीपी और एनएचआईडीसीएल को इन परियोजनाओं को लागू करने का काम सौंपा गया है। अधिकारियों ने कहा कि एजेंसियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसमें अधिक ऊंचाई के कारण सीमित कामकाजी मौसम, दुर्गम इलाके, वैधानिक मंजूरी के अलावा लोगों और सामग्रियों को स्थानांतरित करने के लिए कनेक्टिविटी की स्थापना और रखरखाव शामिल है। हाल ही में, सरकार ने चीन के साथ सीमा पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्यान्वयन को तेजी से ट्रैक करने के लिए सचिवों की एक समिति गठित करने का निर्णय लिया है।

गलवान में संघर्ष के बाद स्ट्रैटेजिक सड़कों के निर्माण पर जोर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। गौरतलब है कि गलवान मे हुए खूनी संघर्ष के बाद भारत ने चीन से लगे पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपने डेप्लॉयमेंट्स और मोबिलाइजेशन के लिए स्ट्रैटेजिक सड़कों के निर्माण पर जोर दिया है। इस कड़ी में बार्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन को पहली बार 5000 करोड रुपये का बड़ा बजट दिया गया है।
शिवानी शर्मा
शिवानी शर्मा author

19 सालों के पत्रकारिता के अपने अनुभव में मैंने राजनीति, सामाजिक सरोकार और रक्षा से जुड़े पहलुओं पर काम किया है। सीमाओं पर देश के वीरों का शौर्य, आत्मन... और देखें

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