Vinesh Chandel: दिल्ली की एक विशेष अदालत ने आई-पैक (I-PAC)के सह-संस्थापक और निदेशक विनेश चंदेल (Vinesh Chandel) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की 10 दिन की हिरासत में भेज दिया है। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से कुछ सप्ताह पहले हुई एक बड़ी कार्रवाई में केंद्रीय जांच एजेंसी ने सोमवार देर शाम चंदेल को चुनाव वाले राज्य में कथित कोयला घोटाले से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था।
चंदेल को 10 दिन की ईडी हिरासत में भेजा गया
अधिकारियों ने बताया कि भोपाल के एनएलआईयू से कानून स्नातक चंदेल को पूछताछ के बाद हिरासत में लिया गया और सोमवार देर रात धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। इस जांच के तहत ईडी ने 2 अप्रैल को चंदेल के दिल्ली स्थित परिसर, आई-पैक के एक अन्य सह-संस्थापक और निदेशक ऋषि राज सिंह के बेंगलुरु स्थित परिसर और आम आदमी पार्टी के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर के मुंबई स्थित परिसर पर छापेमारी की थी।
अभिषेक बनर्जी ने उठाए सवाल
आई-पैक 2021 से टीएमसी और पश्चिम बंगाल सरकार को राजनीतिक परामर्श सेवाएं प्रदान कर रहा है। संगठन की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोमवार रात इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चंदेल की गिरफ्तारी से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं। अभिषेक बनर्जी ने X पर एक पोस्ट में कहा, चुनावों से महज 10 दिन पहले आई-पैक के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह निष्पक्ष चुनावी मैदान के सिद्धांत को ही हिला देती है।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने 8 जनवरी को इस मामले के संबंध में आई-पैक कार्यालय और इसके संस्थापक और निदेशकों में से एक प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित आवास पर छापेमारी की, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं और दस्तावेज अपने साथ ले गईं।
ममता बनर्जी पर बाधा डालने का आरोप
ईडी ने कहा कि कोलकाता में आई-पैक और जैन के खिलाफ उसकी तलाशी में ममता बनर्जी ने बाधा डाली, और दावा किया कि संबंधित दस्तावेज और उपकरण जबरन ले गईं। मुख्यमंत्री और टीएमसी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि ईडी राज्य में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आई-पैक परिसर से चुनाव रणनीति से संबंधित दस्तावेज लेने की कोशिश कर रही थी। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव होंगे।
ईडी ने मुख्यमंत्री द्वारा सत्ता के इस घोर दुरुपयोग की सीबीआई जांच की मांग सुप्रीम कोर्ट से की है, जो वर्तमान में इस मामले की सुनवाई कर रहा है। पीएमएलए मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो की नवंबर 2020 की एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें पश्चिम बंगाल के आसनसोल और आसपास के कुनुस्तोरिया और कजोरा क्षेत्रों में स्थित ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से संबंधित करोड़ों रुपये के कोयला चोरी घोटाले का आरोप लगाया गया है। ईडी ने एक बयान में कहा था कि इस कथित कोयला तस्करी गिरोह से जुड़े एक हवाला ऑपरेटर ने आई-पैक की पंजीकृत कंपनी इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड को करोड़ों रुपये के लेनदेन में सुविधा प्रदान की थी।
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