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मोदी कैबिनेट के बड़े फैसले: 1.27 लाख करोड़ रुपये के सेमिकॉन 2.0 को मंजूरी, काशी को मिले दो मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर

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मोदी कैबिनेट

Photo : PTI

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए ‘सेमिकॉन 2.0’ कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए कुल 1,27,500 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही काशी के लिए दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को भी मंजूरी

दी गई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री वैष्णव ने बताया कि मंत्रिमंडल ने 14,447.64 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच छह लेन के नए एलिवेटेड गलियारे को मंजूरी दी ।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग आधुनिक अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र की बुनियाद है। मोबाइल फोन, कैमरा, रेफ्रिजरेटर, टीवी, एयर कंडीशनर, वाहन, रेल और रक्षा उपकरणों से लेकर मिसाइलों तक, लगभग हर आधुनिक तकनीक में सेमीकंडक्टर चिप्स की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स आज एक स्वतंत्र और रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में उभरा है और यह पहल अब पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन को कवर करेगी। वैष्णव के अनुसार, यह प्रक्रिया सिलिकॉन इन्गॉट से शुरू होकर वेफर निर्माण और उसके बाद फैब्रिकेशन तक जाती है, जिसमें अत्यधिक सूक्ष्म और जटिल तकनीकी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।

मंत्री ने सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन की जटिलता को समझाने के लिए कहा कि यदि किसी व्यक्ति से अपने नाखून पर अपना नाम लिखने को कहा जाए तो यह संभव है, लेकिन उसी नाखून पर पूरी रामायण या महाभारत लिखने जैसी सूक्ष्मता और सटीकता की आवश्यकता सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन में होती है।

काशी के लिए दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को भी मंजूरी

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वाराणसी में तेजी से बढ़ रहे पर्यटकों और यातायात दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने शहर के लिए दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि काशी में हर साल लगभग 15 करोड़ पर्यटक पहुंचते हैं, जिसके चलते आधुनिक परिवहन अवसंरचना की आवश्यकता बढ़ गई है।

वाराणसी में छह और चार लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी

पहली परियोजना वरुणा नदी के किनारे विकसित होने वाला 'वरुणा एक्सप्रेसवे' है। यह 43 किलोमीटर लंबा छह और चार लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर होगा, जिसे हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर 10,998 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है और इसे लगभग चार वर्षों में पूरा किया जाएगा।

गंगा नदी के समानांतर भी बनाया जाएगा एलिवेटेड कॉरिडोर

इसके अलावा गंगा नदी के समानांतर 46 किलोमीटर लंबा छह लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर भी बनाया जाएगा। यह कॉरिडोर आईआईटी-बीएचयू, लंका चौराहा और रामनगर क्षेत्र को जोड़ेगा। इस परियोजना के तहत एक सिग्नेचर केबल-स्टे ब्रिज का भी निर्माण किया जाएगा। इस कॉरिडोर पर 14,448 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

वैष्णव ने कहा कि वरुणा और गंगा दोनों एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के बाद वाराणसी में यातायात जाम की समस्या में बड़ी राहत मिलेगी और शहर की कनेक्टिविटी तथा शहरी बुनियादी ढांचे को नया आयाम मिलेगा।

मोबाइल पीएलआई 2.0 के लिए 62,500 करोड़ रुपये की मंजूरी

इसके अलावा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोबाइल फोन उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के दूसरे चरण यानी मोबाइल पीएलआई 2.0 के लिए 62,500 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है। वैष्णव ने कहा कि इसके तहत देश में मोबाइल फोन निर्माण, निवेश और निर्यात को और बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, स्मार्टफोन वर्ष 2025 में भारत के सबसे बड़े निर्यात उत्पाद के रूप में उभरे हैं। कैलेंडर वर्ष 2025 में देश से 2.62 लाख करोड़ रुपये मूल्य के स्मार्टफोन का निर्यात हुआ, जिसमें आईफोन निर्माता एप्पल की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही।

उन्होंने कहा कि मोबाइल विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों में उठाए गए कदमों का असर यह हुआ है कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन गया है। देश में मोबाइल फोन उत्पादन वित्त वर्ष 2019-20 के 2.14 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 5.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। मोबाइल पीएलआई 2.0 योजना से आने वाले वर्षों में निवेश, रोजगार और निर्यात में और वृद्धि होने की उम्मीद है। साथ ही, इससे वैश्विक कंपनियों को भारत में विनिर्माण गतिविधियां बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और 'मेक इन इंडिया' तथा 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को मजबूती मिलेगी।

मोदी कैबिनेट के अन्य प्रमुख फैसले

    गुजरात के पोरबंदर में ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर: घरेलू जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए पोरबंदर में नया शिपबिल्डिंग क्लस्टर स्थापित किया जाएगा।

  • वाडिनार में 1,570 करोड़ रुपये की शिप रिपेयर सुविधा: सरकार ने गुजरात के वाडिनार में जहाज मरम्मत सुविधा के लिए वित्तीय सहायता को मंजूरी दी, जिससे विदेशी शिप रिपेयर सुविधाओं पर निर्भरता कम होगी।
  • उड़ीसा और झारखंड में रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं: चार जिलों को कवर करने वाली दो रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। 3,907 करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 145 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
  • राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति 2026 (NIPU-2026): देश में गैस आधारित नए यूरिया संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करने और यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए नई नीति को मंजूरी दी गई।
  • Shiv Shukla
    शिव शुक्ला author

    शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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