मध्य प्रदेश के उज्जैन में रामकथा के दौरान दिए बयान पर मचे बवाल के बाद कवि कुमार विश्वास ने माफी मांग ली है। बुधवार (22 फरवरी, 2023) को उन्होंने इस बाबत एक वीडियो संदेश जारी किया और बताया कि असल में क्या हुआ था और उन्होंने क्या-कुछ कहा था। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी टिप्पणी को गलत संदर्भ में लिया गया।
उन्होंने अपने वीडियो संदेश में दो टूक कहा- पढ़ता-लिखता कम है। बोलता ज्यादा है। मैंने उससे पढ़ने के लिए कहा था। वापमंथ को पढ़ो और तुम अनपढ़ हो। सिर्फ इतनी सी बात मैंने कही थी। कुछ विंघ्न संतोषियों ने इसे ज्यादा फैला दिया। आज मुझे कुछ समाचार मिले कि मित्रों ने कहा कि वे इस कथा को भंग करेंगे। भाई, राम की कथा कौन भंग करता है? यह भी ध्यान रखिए।
बकौल विश्वास, "मेरी अपील है कि वहां पहुंचें। मैं जो कुछ भी बोल रहा हूं, आपका उसका अर्थ उसी हिसाब से लगाएं कि जो मैं बोल रहा हूं। आप किसी नए अर्थ में समझेंगे तो उसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं। आपने अगर इसे किसी और तरह से समझा या लिया है तो उसके लिए मुझे माफ कर दें। दो ढाई घंटे में जो कुछ राम की कथा से नवनीत निकल सकता है, उसे सीखने समझने का प्रयास करें।" दरअसल, विश्वास की टिप्पणी पर भारी सियासी बवाल देखने को मिला। भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया पर इस मामले में कड़ी टिप्पणी देने के साथ शहर में लगे होर्डिंग भी फाड़ दिए थे।
हुआ यूं था कि विश्वास ने उज्जैन में 21 फरवरी, 2023 को राम कथा के दौरान उन्होंने अपने कार्यालय में काम करने वाले एक बालक को लेकर टिप्पणी की थी। संयोग से वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में काम करता है। वह पढ़ता लिखता कम है और बोलता अधिक है। ऐसे में मैंने उससे कहा था- तुम पढ़ा करो...पढ़ते नहीं हो। वामपंथी कुपढ़ हैं और तुम अनपढ़ हो।
